पंजाब में पराली पर प्रशासन की सख्त कार्रवाई: 510 मामले दर्ज, 9 लाख से ज्यादा का जुर्माना और 4 FIR दर्ज

पंजाब में पराली पर प्रशासन की सख्त कार्रवाई: 510 मामले दर्ज, 9 लाख से ज्यादा का जुर्माना और 4 FIR दर्ज

पंजाब में धान की पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है. पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में पराली जलाने के 510 से अधिक मामले सामने आए हैं, जिनमें लाखों का पर्यावरणीय मुआवजा और FIR दर्ज की गई हैं. सबसे ज्यादा मामले अमृतसर और तरनतारन में दर्ज हुए हैं. वहीं, किसान नेताओं ने FIR और रेड एंट्री की कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए इसे किसानों को प्रताड़ित करना बताया है.

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पंजाब में पराली जलाने पर प्रशासन सख्त, अधिकारियों को भी चेतावनी नोटिसपंजाब में पराली के 510 मामले दर्ज (सांकेतिक तस्वीर)

पंजाब में धान की कटाई के साथ ही पराली (फसल अवशेष) जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए राज्य प्रशासन और पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) ने निगरानी और कार्रवाई तेज कर दी है. PPCB की 22 अक्टूबर 2026 तक की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में पराली जलाने के कुल 510 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें से 467 स्थानों का निरीक्षण किया जा चुका है.

अमृतसर और तरनतारन में सबसे ज्यादा मामले

  • जिलावार आंकड़ों पर नजर डालें तो अमृतसर और तरनतारन जिले पराली जलाने के मामलों में सबसे आगे हैं.
  • अमृतसर: 136 घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें से 127 का निरीक्षण हुआ और 51 मामलों में मुआवजा (फाइन) लगाया गया.
  • तरनतारन: 247 मामले सामने आए, जिनमें 229 का निरीक्षण किया गया और 97 मामलों में पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया.
  • अन्य जिले: गुरदासपुर में 32, फिरोजपुर में 26, कपूरथला में 18, फाजिल्का व जालंधर में 9-9 और पटियाला में 5 मामले सामने आए हैं.

(नोट: रिपोर्ट में जिलावार दर्ज आंकड़ों और राज्य के कुल आंकड़े में थोड़ा अंतर दिखाई देता है, जिसकी प्रशासनिक स्तर पर पुष्टि होना बाकी है.)

लाखों का जुर्माना, FIR और रेड एंट्री की कार्रवाई

प्रशासन की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार, पराली जलाने वाले किसानों पर कुल 9.30 लाख रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा (Environmental Compensation) लगाया गया है, जिसमें से 4.93 लाख रुपये की वसूली की जा चुकी है.

पराली रोकने में ढिलाई बरतने या निगरानी में लापरवाही को लेकर 227 नोडल और सुपरवाइजरी अधिकारियों को चेतावनी नोटिस दिए गए हैं.

अब तक 4 मामलों में एफआईआर (FIR) दर्ज की जा चुकी है और 166 मामलों में किसानों के लैंड रिकॉर्ड में 'रेड एंट्री' (Red Entry) दर्ज की गई है.

फिरोजपुर: खुद खेतों में पहुंचकर आग बुझा रहे अधिकारी

फिरोजपुर जिले में पराली जलाने के 23 मामले सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने फील्ड में सक्रियता बढ़ा दी है ब तक 10 मामलों में एफआईआर दर्ज की जा चुकी है, जिनमें से 7 मामले बुधवार को ही दर्ज किए गए.

एडीसी (डी) कृष्णा पाल राजपूत ने बताया कि वह खुद और जिले के सभी एसडीएम (SDM) लगातार फील्ड में जाकर निगरानी कर रहे हैं. जहां भी खेत में आग लगने की सूचना मिलती है, अधिकारी खुद मौके पर पहुंचकर आग बुझाने में जुट जाते हैं.

'अनाज उगाने वाले किसान को किया जा रहा जलील'

प्रशासनिक कड़ाई और कानूनी कार्रवाई को लेकर किसानों में भारी नाराजगी है. किसान नेता अवतार सिंह ने कहा कि किसान अब काफी जागरूक हो चुके हैं और अपने स्तर पर पराली का निपटारा कर रहे हैं. इसके बावजूद सरकार किसानों पर एफआईआर दर्ज करके और जमीन के कागजों में 'रेड एंट्री' करके उन्हें जलील करने का काम कर रही है. उन्होंने कहा कि जो किसान पूरे देश के लिए अनाज पैदा करता है, उसके साथ ऐसा बर्ताव बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है.

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