बिहार में खाद की किल्लत नहीं: सरकार का दावा, ढाई लाख टन की जरूरत के मुकाबले पर्याप्त भंडार मौजूद

बिहार में खाद की किल्लत नहीं: सरकार का दावा, ढाई लाख टन की जरूरत के मुकाबले पर्याप्त भंडार मौजूद

बिहार में खरीफ सीजन से पहले किसानों के बीच उर्वरकों की मांग बढ़ने के बावजूद सरकार ने किसी भी तरह की कमी से इनकार किया है. कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा के अनुसार राज्य में जरूरत से अधिक यूरिया, डीएपी, एनपीके और एसएसपी का भंडार उपलब्ध है. वहीं, कालाबाजारी और जमाखोरी पर रोक लगाने के लिए अब तक 29 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं और 208 दुकानों के लाइसेंस रद्द किए गए हैं.

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बिहार में खाद की किल्लत नहीं: सरकार का दावा, ढाई लाख टन की जरूरत के मुकाबले पर्याप्त भंडार मौजूदबिहार में खाद की किल्लत नहीं, सरकार का दावा

बिहार में किसान धान का बिजड़ा डालना शुरू कर चुके हैं. इसके साथ ही वे खरीफ सीजन में धान की खेती से पहले रासायनिक उर्वरक इकट्ठा करने की जद्दोजहद में लगे हुए हैं, जिसको लेकर इन दिनों खाद दुकानों पर भीड़ भी देखी जा रही है. ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव की वजह से उर्वरकों की अनुपलब्धता की आशंकाओं के बीच किसान इस सोच में हैं कि समय रहते उर्वरक रख लिया जाए. हालांकि, बिहार में उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर कृषि मंत्री बिहार विजय कुमार सिन्हा ने कहा है कि राज्य में किसानों के लिए उर्वरकों की किसी प्रकार की कमी नहीं है और सभी जिलों में पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध हैं. वहीं, अब तक 208 प्रतिष्ठानों के उर्वरक प्राधिकार पत्र रद्द किए गए हैं.

बिहार में उपलब्ध है उर्वरक

कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि राज्य में 30 जून तक 2.40 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 1 लाख मीट्रिक टन डीएपी, 1.25 लाख मीट्रिक टन एन.पी.के. और 0.55 लाख मीट्रिक टन एसएसपी की जरूरत है, जबकि 3 जून 2026 तक राज्य में 3.76 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 1.54 लाख मीट्रिक टन डीएपी, 2.38 लाख मीट्रिक टन एन.पी.के. और  1.17 लाख मीट्रिक टन एसएसपी का भंडार उपलब्ध है. वहीं, उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी जरूरत के अनुसार संतुलित मात्रा में उर्वरकों के उपयोग के लिए जागरूक करने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार भी किया जा रहा है.

3 जून तक खाद दुकानों पर हुई इतनी कार्रवाई

कृषि मंत्री ने कहा कि उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी और अधिक मूल्य पर बिक्री रोकने के लिए राज्य सरकार पूरी तरह सतर्क है. अभी तक यानी 3 जून तक अनियमितता के खिलाफ 29 उर्वरक प्रतिष्ठानों पर प्राथमिकी दर्ज की गई है और 208 प्रतिष्ठानों के उर्वरक प्राधिकार पत्र रद्द किए गए हैं. साथ ही उर्वरक दुकानों और प्रतिष्ठानों का नियमित निरीक्षण किया जा रहा है. वहीं, जिलावार कार्रवाई के तहत पूर्वी चंपारण में 323 दुकानों की जांच में 18 दुकानों में अनियमितता पाई गई, जिनमें 8 दुकानदारों पर प्राथमिकी दर्ज की गई और 5 के लाइसेंस रद्द किए गए. 

पश्चिम चंपारण में 343 दुकानों की जांच के दौरान 25 दुकानों में अनियमितता मिली, जिनमें 1 प्राथमिकी दर्ज की गई और 3 लाइसेंस रद्द किए गए. वहीं, सीतामढ़ी में 590 दुकानों के निरीक्षण में 46 दुकानों में अनियमितता पाई गई, जिनमें 2 प्राथमिकी दर्ज की गईं और 7 लाइसेंस रद्द किए गए.

आगे उन्होंने बताया कि सीमावर्ती 7 जिलों में कुल 2,573 दुकानों का निरीक्षण किया गया, जिनमें 275 दुकानों में अनियमितताएं पाई गईं. इसके बाद 19 प्राथमिकी दर्ज की गईं, 123 दुकानों के लाइसेंस रद्द किए गए और 85 दुकानदारों से स्पष्टीकरण मांगा गया है.

फ्लाइंग स्कॉड टीम एक्टिव

कृषि मंत्री सिन्हा ने बताया कि मुख्यालय स्तर पर गठित उड़नदस्ता दल (फ्लाइंग स्कॉड टीम) लगातार शिकायतों की जांच कर रहा है. राज्य में उर्वरकों की कालाबाजारी या जमाखोरी संबंधी शिकायत मिलने पर संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है. वहीं, अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे जिलों में उर्वरकों की अवैध निकासी रोकने के लिए सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के साथ तालमेल बनाकर विशेष निगरानी अभियान चलाया जा रहा है.

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