गांवों के विकास को नई रफ्तारदेश की ग्राम पंचायतों को आर्थिक रूप से मजबूत और डिजिटल रूप से सक्षम बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है. केंद्रीय पंचायती राज एवं मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने सोमवार को आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम, SAMARTH पंचायत पोर्टल और पंचायती राज संस्थाओं (PRI) के लिए मॉडल ओन सोर्स रेवेन्यू (OSR) नियम लॉन्च किए. इन पहलों का उद्देश्य पंचायतों को अपने स्तर पर आय जुटाने में सक्षम बनाना और गांवों में बेहतर प्रशासन व्यवस्था तैयार करना है.
यह कार्यक्रम नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में आयोजित एक समारोह के दौरान शुरू किया गया. इस मौके पर केंद्रीय पंचायती राज राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल, पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज और मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे.
केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि ये तीनों पहल विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं. उन्होंने कहा कि पंचायतें देश के लोकतंत्र और ग्रामीण विकास की सबसे मजबूत कड़ी हैं. अगर पंचायतों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाया जाएगा तो गांवों में विकास कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाया जा सकेगा.
उन्होंने बताया कि आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम के तहत ग्राम पंचायत और ब्लॉक पंचायत अपने क्षेत्र में मौजूद संसाधनों और आर्थिक अवसरों की पहचान करेंगी. इसके बाद इन संसाधनों को आय बढ़ाने वाली योजनाओं और परियोजनाओं में बदला जाएगा.
केंद्र सरकार की इस योजना के तहत पंचायतों को स्थानीय स्तर पर ऐसे प्रोजेक्ट तैयार करने में मदद दी जाएगी, जिनसे उन्हें नियमित आय मिल सके. इन परियोजनाओं को पूरा करने के लिए सरकार तकनीकी सहायता भी उपलब्ध कराएगी.
इन प्रोजेक्ट्स के लिए फंडिंग की व्यवस्था कई माध्यमों से की जाएगी. इसमें पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP), कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR), सरकारी योजनाओं का सहयोग, बैंक लोन और NABARD व HUDCO जैसी संस्थाओं की मदद शामिल होगी.
सरकार ने अगले चार साल में इस कार्यक्रम के तहत 350 परियोजनाएं शुरू करने का लक्ष्य रखा है. पहले साल में 50 परियोजनाएं और अगले तीन वर्षों में हर साल 100-100 परियोजनाएं शुरू करने की योजना है.
आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कुछ मानदंड तय किए गए हैं. जिन ग्राम पंचायतों की अपनी आय कम से कम 50 लाख रुपये है और ब्लॉक पंचायतों की अपनी आय कम से कम 1 करोड़ रुपये है, वे आवेदन कर सकेंगी.
इसके अलावा पंचायतों का कार्यकाल कम से कम तीन साल बाकी होना चाहिए. विशेष श्रेणी वाले राज्यों के लिए पात्रता नियमों में कुछ छूट भी दी गई है. मंत्रालय ने इस योजना को लेकर देश के 10 राज्यों में पंचायत प्रतिनिधियों के साथ जागरूकता कार्यशालाएं भी आयोजित की हैं.
केंद्र सरकार ने पंचायतों की आय और राजस्व व्यवस्था को डिजिटल बनाने के लिए SAMARTH पंचायत पोर्टल भी शुरू किया है. इसे देश का पहला ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म बताया गया है, जो पंचायतों की अपनी आय (Own Source Revenue) को मैनेज करने में मदद करेगा.
इस पोर्टल के माध्यम से पंचायतें टैक्स देने वालों का रजिस्ट्रेशन, टैक्स की मांग तैयार करना, ऑनलाइन भुगतान, राजस्व संग्रह और आय की निगरानी जैसे काम डिजिटल तरीके से कर सकेंगी.
फिलहाल यह पोर्टल छत्तीसगढ़ और हिमाचल प्रदेश में लागू किया जा चुका है. इन राज्यों में 51 लाख से अधिक करदाताओं का रजिस्ट्रेशन किया गया है. मंत्रालय के अनुसार, पोर्टल के माध्यम से अब तक 95 करोड़ रुपये की मांग नोटिस जारी किए गए हैं और 27 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व भी जुटाया जा चुका है.
अब इस पोर्टल को महाराष्ट्र, मिजोरम, असम, हरियाणा, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में भी लागू करने की प्रक्रिया चल रही है.
पंचायती राज संस्थाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए सरकार ने मॉडल ओन सोर्स रेवेन्यू (OSR) नियम भी जारी किए हैं. इन नियमों के जरिए राज्यों को पंचायतों की आय बढ़ाने के लिए एक बेहतर व्यवस्था तैयार करने में मदद मिलेगी.
इन नियमों में प्रॉपर्टी टैक्स, यूजर चार्ज, फीस और अन्य गैर-कर आय के बेहतर प्रबंधन पर जोर दिया गया है. इसका उद्देश्य पंचायतों को अपनी आय बढ़ाने, पारदर्शिता लाने और स्थानीय स्तर पर वित्तीय व्यवस्था को मजबूत बनाना है.
ये नियम 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर तैयार किए गए हैं. हालांकि, राज्यों को अपनी स्थानीय जरूरतों और कानूनों के अनुसार इनमें बदलाव करने की सुविधा भी दी गई है.
कार्यक्रम के दौरान पंचायती राज मंत्रालय की डिजिटल पहलों की भी चर्चा हुई. मंत्रालय को राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 के तहत पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स (PAI) सहित कई पहलों के लिए सम्मान मिला है.
इस उपलब्धि के तहत मंत्रालय को तीन गोल्ड अवॉर्ड और एक सिल्वर अवॉर्ड प्राप्त हुआ है. सरकार का कहना है कि डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल से पंचायतों में पारदर्शिता बढ़ेगी और आम लोगों तक सरकारी सेवाएं बेहतर तरीके से पहुंच सकेंगी.
केंद्र सरकार का कहना है कि आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम, SAMARTH पोर्टल और मॉडल OSR नियमों से देश की पंचायतें आर्थिक रूप से मजबूत होंगी. इससे पंचायतें केवल सरकारी फंड पर निर्भर नहीं रहेंगी, बल्कि अपनी आय के नए स्रोत भी विकसित कर पाएंगी.
इन पहलों से ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर प्रशासन, पारदर्शिता और लोगों की भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है. सरकार का लक्ष्य है कि मजबूत और आत्मनिर्भर पंचायतों के जरिए गांवों के विकास को नई गति दी जाए.
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