महाराष्ट्र किसान राहतकेंद्र सरकार ने महाराष्ट्र में भारी बारिश और बेमौसम बारिश से भारी नुकसान झेलने वाले किसानों के लिए एक अहम और राहत देने वाला फैसला लिया है. केंद्र ने राज्य के 17.29 लाख किसानों के बकाया लोन के रीस्ट्रक्चरिंग को मंजूरी दे दी है. इसके तहत, कुल 266.5877 अरब रुपये के लोन का रीस्ट्रक्चरिंग किया जाएगा, जिससे मुश्किल में फंसे किसानों को काफी मदद मिलेगी.
इस फैसले के मुताबिक, महाराष्ट्र के अलग-अलग जिलों के जिन किसानों की फसल भारी बारिश, बाढ़ और बेमौसम बारिश से खराब हुई है, वे लोन अकाउंट रीस्ट्रक्चरिंग के लिए पात्र होंगे. सभी संबंधित अकाउंट्स का वेरिफिकेशन पूरा हो गया है, और संबंधित जानकारी सदस्य बैंकों ने महाराष्ट्र राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) को सौंप दी है. इसलिए, रीस्ट्रक्चरिंग की प्रक्रिया जल्द ही शुरू होने की उम्मीद है.
केंद्र सरकार ने साफ किया है कि संशोधित ब्याज सब्सिडी योजना के तहत, रीस्ट्रक्चर किए गए लोन की रकम पर पहले साल रियायती ब्याज दर लागू होगी. हालांकि, दूसरे साल से इन लोन पर बैंकों की सामान्य ब्याज दर लगेगी. इससे किसानों को शुरुआत में आर्थिक राहत मिलेगी और उन्हें अपनी खेती को फिर से शुरू करने का समय मिलेगा.
कई जिलों में भारी बारिश से फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं, जिससे किसान आर्थिक संकट में हैं. यह फैसला राज्य के सांसदों द्वारा इस गंभीर स्थिति को केंद्र सरकार के ध्यान में लाने के बाद लिया गया है. केंद्र सरकार ने साफ निर्देश दिए हैं कि रीस्ट्रक्चरिंग प्रक्रिया के दौरान प्रभावित किसानों से लोन रिकवरी के लिए कोई दबाव नहीं डाला जाना चाहिए. लोन रिकवरी पर अस्थायी रोक से किसानों पर मानसिक और आर्थिक तनाव कम होगा.
महाराष्ट्र सरकार ने 26 नवंबर, 2025 को एक पत्र जारी कर राज्य में प्राकृतिक आपदा की घोषणा की. इसके आधार पर, महाराष्ट्र SLBC ने राज्य के सभी बैंकों को RBI के दिशानिर्देशों के अनुसार काम करने का निर्देश दिया है. प्रदेश में फसल लोन का रीस्ट्रक्चरिंग करना और बाढ़ प्रभावित किसानों से लोन रिकवरी को टालना अनिवार्य कर दिया गया है. माना जा रहा है कि यह फैसला प्राकृतिक आपदा के कारण मुश्किलों का सामना कर रहे किसानों को बड़ी राहत देगा और कृषि क्षेत्र को उबरने में मदद करेगा.
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