
मध्य प्रदेश के किसानों और प्रदेश के औद्योगिक विकास को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कई अहम फैसले लिए गए. मंत्रालय में हुई बैठक में खरीफ सीजन 2026 के सोयाबीन उत्पादक किसानों को उचित मूल्य दिलाने के लिए प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (PM-AASHA) के तहत भावांतर भुगतान योजना लागू करने की मंजूरी दी गई. इसके साथ ही प्रदेश के सर्वांगीण विकास से जुड़े करीब 27,050 करोड़ रुपये के विभिन्न प्रस्तावों को भी स्वीकृति प्रदान की गई.
कैबिनेट के फैसले के मुताबिक, भावांतर योजना के तहत किसानों को सोयाबीन के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और योजना के प्रावधानों के अनुसार निर्धारित राशि के आधार पर आर्थिक सहायता दी जाएगी.वहीं, जबलपुर-इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर के विकास के लिए एक विशेष सरकारी कंपनी के गठन को मंजूरी दी गई है. इसके अलावा सिंचाई परियोजनाओं, सरकारी स्कूलों, आयुष सेवाओं और अन्य विभागीय योजनाओं को जारी रखने के लिए भी हजारों करोड़ रुपये के प्रावधान किए गए हैं.
मध्य प्रदेश सरकार ने खरीफ वर्ष 2026 में सोयाबीन उत्पादक किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए भावांतर भुगतान योजना लागू करने का निर्णय लिया है. यह योजना केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (PM-AASHA) के अंतर्गत प्राइस डिफिसिट पेमेंट स्कीम (PDPS) के दिशा-निर्देशों के अनुसार संचालित की जाएगी. इसका उद्देश्य बाजार में सोयाबीन की कीमत कम रहने पर किसानों को आर्थिक राहत देना है.
योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को खाद्य विभाग के ई-उपार्जन पोर्टल पर 17 अक्टूबर 2026 तक पंजीयन कराना अनिवार्य होगा. योजना के तहत अधिसूचित मंडियों में सोयाबीन बेचने की अवधि 22 अक्टूबर 2026 से 15 जनवरी 2027 तक निर्धारित की गई है. जरूरत पड़ने पर इस अवधि में बदलाव भी किया जा सकता है.
किसानों को मिलने वाली भावांतर राशि की गणना उनके पंजीकृत रकबे और पिछले वर्ष विभाग द्वारा निर्धारित राज्य स्तरीय औसत उत्पादकता के आधार पर तय पात्र मात्रा के अनुसार की जाएगी.
सरकार के फैसले के अनुसार, जिन किसानों ने 1 अक्टूबर से 21 अक्टूबर 2026 के बीच मंडियों में सोयाबीन बेच दी है, उस मात्रा को उनकी कुल पात्रता से घटाया जाएगा. इसके बाद बची हुई पात्र मात्रा पर ही भावांतर राशि का भुगतान किया जाएगा.
योजना में भुगतान को पारदर्शी बनाने के लिए मॉडल रेट की व्यवस्था लागू की गई है. शुरुआत में 22 अक्टूबर से पहले 14 दिनों के लिए मॉडल रेट प्रदेश की मंडियों के भारित औसत के आधार पर निर्धारित किया जाएगा. इसके बाद पिछले 14 दिनों के भारित औसत के आधार पर प्रतिदिन मॉडल रेट तय होगा. इसे ई-मंडी पोर्टल पर प्रदर्शित किया जाएगा.
भावांतर की राशि सीधे किसानों के पंजीकृत बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए भेजी जाएगी. योजना के क्रियान्वयन के लिए राज्य स्तर पर मुख्य सचिव और जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में समितियां गठित की जाएंगी.
योजना के तहत किसानों को भुगतान की व्यवस्था मध्य प्रदेश राज्य कृषि विपणन (मंडी) बोर्ड के माध्यम से की जाएगी. इसके लिए सबसे पहले मंडी बोर्ड के मूल्य स्थिरीकरण कोष का इस्तेमाल किया जाएगा. यदि कोष में पर्याप्त राशि उपलब्ध नहीं होती है, तो राज्य सरकार मंडी बोर्ड को एक वर्ष के लिए 1,500 करोड़ रुपये की ब्याज-मुक्त साख सीमा उपलब्ध कराएगी.इस व्यवस्था का उद्देश्य भावांतर भुगतान की प्रक्रिया को सुचारू बनाए रखना और पात्र किसानों तक सहायता पहुंचाना है.
कैबिनेट ने बुरहानपुर, रायसेन, मंदसौर और सिंगरौली की सिंचाई परियोजनाओं को जारी रखने के लिए 3,076.37 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है. इन परियोजनाओं के माध्यम से सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और कृषि क्षेत्र को सहयोग देने से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाया जा सकेगा.
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