लोकसभा में जवाब देते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहानलोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान केंद्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पश्चिम बंगाल सरकार और विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस की सरकार राजनीतिक कारणों से केंद्र की कई महत्वपूर्ण कृषि योजनाओं को लागू नहीं कर रही है, जिससे राज्य के गरीब किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है. शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि देशभर में किसानों के लिए चलाई जा रही योजनाओं का लाभ अधिकांश राज्यों में मिल रहा है, लेकिन पश्चिम बंगाल में कई योजनाएं केवल इसलिए रोकी जा रही हैं क्योंकि उनमें प्रधानमंत्री का नाम जुड़ा हुआ है. उन्होंने इसे किसानों के हितों के खिलाफ “घटिया राजनीति” बताते हुए कहा कि ऐसी नीतियों से सीधे खेतों में काम करने वाले किसानों को नुकसान हो रहा है.
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं, जिनका उद्देश्य किसानों की लागत कम करना, सिंचाई सुविधाएं बढ़ाना और खेती को अधिक लाभकारी बनाना है. उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में इन योजनाओं को लागू करने में जानबूझकर बाधाएं खड़ी की गई हैं.
उन्होंने कहा कि देश के 100 में से 96 जिलों में कृषि विकास से जुड़ी योजनाएं लागू हो चुकी हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल के कुछ सीमावर्ती जिलों को इससे बाहर रखा गया. इन योजनाओं से किसानों को बेहतर तकनीक, वित्तीय सहायता और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिल सकती थी, लेकिन राज्य सरकार के रवैये के कारण कई किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है.
शिवराज सिंह चौहान ने संसद में विपक्षी दलों की रणनीति पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि विपक्ष तख्तियां लेकर विरोध और नारेबाजी में लगा हुआ है, जबकि सरकार किसानों के हित में योजनाओं को आगे बढ़ाने में जुटी है. उन्होंने कहा कि संसद के भीतर हंगामा करने से किसानों की समस्याएं हल नहीं होंगी. देश देख रहा है कि कौन किसान हित में काम कर रहा है और कौन केवल राजनीति कर रहा है. मंत्री ने कहा कि विपक्ष का यह रवैया किसानों के मुद्दों पर गंभीर चर्चा से ध्यान भटकाने का प्रयास है.
केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि पिछले वर्षों में देश के कृषि क्षेत्र ने उल्लेखनीय प्रगति की है. उन्होंने बताया कि भारत का कुल खाद्यान्न उत्पादन लगभग 357 मिलियन टन तक पहुंच गया है, जो अब तक का रिकॉर्ड स्तर है.
उन्होंने कहा कि चावल उत्पादन में भारत ने 150 मिलियन टन से अधिक उत्पादन के साथ दुनिया में अग्रणी स्थान हासिल किया है. इसके अलावा गेहूं, सरसों, सोयाबीन और मूंगफली जैसी फसलों में भी उत्पादन में बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
मंत्री ने कहा कि एक समय ऐसा था जब देश को गेहूं के लिए आयात पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है और देश के गोदाम अनाज से भरे हुए हैं. उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि किसानों की मेहनत और कृषि क्षेत्र में किए गए सुधारों का परिणाम है.
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार ने दालों और बागवानी फसलों के उत्पादन को बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया है. उन्होंने बताया कि दालों का उत्पादन पिछले वर्षों में लगभग 19 मिलियन टन से बढ़कर 25 से 26 मिलियन टन के आसपास पहुंच गया है.
इसी तरह फल और सब्जियों सहित बागवानी उत्पादन भी 369 मिलियन टन से अधिक के स्तर तक पहुंच चुका है. उन्होंने कहा कि इससे किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिली है और देश की पोषण सुरक्षा भी मजबूत हुई है.
केंद्रीय मंत्री ने प्राकृतिक खेती को भविष्य की टिकाऊ कृषि व्यवस्था बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य मिट्टी की सेहत सुधारना और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करना है. उन्होंने कहा कि गंगा सहित प्रमुख नदियों के किनारे बड़े क्षेत्रों में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है.
उन्होंने यह भी कहा कि लाखों किसानों को प्राकृतिक खेती के बारे में प्रशिक्षण दिया गया है और कई स्थानों पर क्लस्टर बनाकर रसायन मुक्त खेती शुरू की जा चुकी है. सही तरीके से अपनाने पर प्राकृतिक खेती में उत्पादन घटता नहीं बल्कि कई मामलों में बढ़ता भी है.
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि प्राकृतिक खेती के तहत किसानों को स्थानीय संसाधनों के उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. देसी गाय के गोबर और गोमूत्र से तैयार जैविक घोल, पारंपरिक कृषि तकनीकों और मिश्रित फसल प्रणाली को बढ़ावा दिया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि इससे खेती की लागत कम होती है और मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार आता है. सरकार का लक्ष्य ऐसी कृषि प्रणाली विकसित करना है जो किसानों के लिए लाभकारी होने के साथ पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित हो.
केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य भारत को वैश्विक स्तर पर खाद्यान्न उत्पादन का प्रमुख केंद्र बनाना है. उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड उत्पादन और मजबूत कृषि नीतियों के कारण भारत दुनिया के कई देशों के लिए भरोसेमंद खाद्य आपूर्तिकर्ता के रूप में उभर रहा है.
उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में कृषि क्षेत्र को और मजबूत बनाकर देश को “फूड बास्केट ऑफ द वर्ल्ड” के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को टिकाऊ बनाने के लिए सरकार लगातार नई योजनाएं और पहल लागू कर रही है.
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