गन्ना किसानों का आंदोलन स्थगित (AI Image)उत्तर कर्नाटक के गन्ना किसानों ने अपनी मांगों को लेकर चल रहे सप्ताह भर के ‘हुबली चलो’ आंदोलन को फिलहाल स्थगित कर दिया है. किसानों ने केंद्र और राज्य सरकार को मांगों पर कार्रवाई के लिए 26 नवंबर तक का समय दिया है. किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि तय समय तक मांगें पूरी नहीं होने पर 27 नवंबर से आंदोलन फिर शुरू किया जाएगा और केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी के आवास का घेराव किया जाएगा.
उत्तर कर्नाटक के गन्ना उत्पादक अपनी मांगों को लेकर केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी के हुबली स्थित आवास की ओर पैदल मार्च कर रहे थे. इससे पहले किसानों ने बेलगावी के पास पुणे-बेंगलुरु राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी प्रदर्शन किया था. केंद्र सरकार की ओर से किसानों की समस्याओं की जांच के लिए समिति गठित किए जाने के बावजूद मांगों पर स्पष्ट आश्वासन नहीं मिलने से किसान नेताओं ने आंदोलन को केंद्रीय मंत्री के आवास तक ले जाने का फैसला किया था.
किसान गन्ने का मूल्य 5,500 रुपये प्रति टन करने, चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य बढ़ाकर 60 रुपये प्रति किलोग्राम करने और गन्ने से बनने वाले एथेनॉल की खरीद नीति की समीक्षा करने की मांग कर रहे हैं. किसानों का कहना है कि उनकी मांगों पर ठोस निर्णय लिया जाना चाहिए, ताकि गन्ना उत्पादकों को उचित मूल्य मिल सके.
आंदोलन को स्थगित करने का फैसला रविवार देर रात हुबली में किसान नेताओं और केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी, कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और बेलगावी के सांसद जगदीश शेट्टर, विधायकों और अधिकारियों के बीच हुई बातचीत के बाद लिया गया. सोमवार को किसान नेताओं ने विभिन्न जिलों के प्रतिनिधियों के साथ भी चर्चा की. इसके बाद धारवाड़ जिले में यरीकोप्पा के पास प्रशासन और पुलिस अधिकारियों के साथ बातचीत के बाद आंदोलन स्थगित करने की घोषणा की गई.
यरीकोप्पा क्रॉस पर किसान नेता चुनप्पा पुजारी ने कहा कि प्रह्लाद जोशी ने किसानों की मांगों पर विचार करने के लिए समय मांगा है. उन्होंने राज्य सरकार से अपील की कि अगले चार से पांच दिनों के भीतर बेलगावी में चीनी मिल मालिकों और किसान प्रतिनिधियों की बैठक बुलाई जाए, ताकि विवाद का समाधान निकाला जा सके.
पुजारी ने यह भी मांग की कि किसानों की समस्याओं का समाधान होने तक चीनी मिलों से चीनी के परिवहन पर रोक लगाई जाए. उनका कहना था कि किसानों की चिंताओं का समाधान किए बिना चीनी की आवाजाही जारी रहने से किसानों और आम लोगों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है.
पुजारी ने बताया कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी से मिले आश्वासन के आधार पर किसानों ने सरकारों को 26 नवंबर तक का समय देने पर सहमति जताई है. उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर इस अवधि में मांगों पर कार्रवाई नहीं होती है, तो 27 नवंबर से आंदोलन दोबारा शुरू किया जाएगा.
किसान नेता शशिकांत गुरुजी ने कहा कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बेलगावी स्थित सुवर्ण विधान सौधा में चीनी मिल मालिकों के साथ बैठक आयोजित करने का आश्वासन दिया है. उन्होंने मांग की कि इस बैठक में किसान प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाए. साथ ही, गन्ना किसानों की समस्याओं की जांच के लिए केंद्र सरकार की ओर से गठित समिति में भी किसानों के प्रतिनिधियों को जगह दी जाए.
गुरुजी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मुख्यमंत्री शिवकुमार की ओर से लिखे गए पत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि वह किसानों के मुद्दे को केंद्र सरकार के समक्ष प्रभावी ढंग से उठाए. उन्होंने अधिकारियों से तय समयसीमा के भीतर दिए गए आश्वासनों पर कार्रवाई करने की अपील की.
आंदोलन स्थगित किए जाने की घोषणा के बाद हफ्तेभर से पैदल मार्च और राजमार्ग पर प्रदर्शन कर रहे किसान सोमवार शाम अपने-अपने गांवों की ओर लौटने लगे. हालांकि, किसान नेताओं ने साफ किया कि 26 नवंबर तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में 27 नवंबर से आंदोलन फिर शुरू किया जाएगा. (पीटीआई)
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