
मध्य प्रदेश के भिंड जिले में सरसों की बुवाई शुरू होते ही किसानों के सामने डीएपी खाद का संकट खड़ा हो गया है. खाद वितरण केंद्रों के कई चक्कर लगाने के बावजूद किसानों को डीएपी नहीं मिल पा रही है. इस वजह से किसान खासे परेशान हैं.

जिले भर के किसानों के लिए डीएपी की पूर्ति करने के लिए 10000 मीट्रिक टन डीएपी की डिमांड जिला कलेक्टर की तरफ से उच्च अधिकारियों को भेजी गई है. दरअसल अक्टूबर महीने की शुरुआत होते ही किसानों ने अपने खेतों में सरसों की बुवाई शुरू कर दी है.

रबी सीजन में भिंड जिले के किसान सरसों की फसल की पैदावार करते हैं. सरसों की बुवाई के साथ ही किसानों को डीएपी खाद की जरूरत महसूस होने लगी है. डीएपी खाद पाने के लिए किसान टोकन लेकर खाद वितरण केंद्रों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें डीएपी खाद नहीं मिल पा रही है.

किसानों का कहना है कि टोकन लेने के बावजूद डीएपी खाद नहीं दी जा रही है, जबकि डीएपी खाद के बदले एपीएस खाद दी जा रही है, लेकिन किसान एनपीएस खाद को लेने को तैयार नहीं हैं. किसानों का कहना है कि उन्होंने हमेशा से डीएपी खाद का ही इस्तेमाल किया है, जिसकी फसलों पर परिणाम भी अच्छे आए हैं.

इस मामले में भिंड के कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव का कहना है कि वह जिले में डीएपी की किल्लत नहीं होने देंगे. उन्होंने 10000 मीट्रिक टन डीएपी खाद की डिमांड भेजी है और जल्द ही डीएपी खाद की समस्या दूर कर दी जाएगी. जिला कलेक्टर की तरफ से डिमांड भेज दी गई है.

किसान अवधेश ने कहा कि काफी समस्या आ रही है. कल उन्हें टोकन देकर ये कहा गया था कि खाद मिलेगी. उन्हें डीएपी का टोकन मिला था लेकिन वहां जाने के पता चला कि डीएपी नहीं मिल रही है. उन्होंने कहा कि उन्हें अपनी सरसों की फसल के लिए डीएपी खाद चाहिए क्योंकि वो हर साल यही खाद डालते हैं.

भिंड जिला के कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव ने कहा कि खाद और यूरिया की कमी बताई जा रही थी. अब यूरिया का कोई संकट नहीं है. अब किसानों की तरफ से डीएपी की मांग की जा रही है. डीएपी मूल रूप से गेहूं के लिए उर्वरक होता है और सरसों के लिए एनपीएस भी उर्वरक होता है, लेकिन ज्यादातर लोग डीएपी की मांग कर रहे हैं.
(हेमंत शर्मा की रिपोर्ट)
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