
कृषि की दृष्टि से समृद्ध औरैया जनपद में किसानों के लिए एक अहम पहल देखने को मिली, जब उत्तर प्रदेश सरकार और इंडिया टुडे ग्रुप के संयुक्त प्रयास से “किसान तक” द्वारा संचालित किसान कारवां औरैया जिले के बूढ़ा दाना गांव पहुंचा. प्रदेश के 75 जिलों की कवरेज के तहत चल रहे इस अभियान में औरैया 14वां पड़ाव रहा.

कार्यक्रम के दौरान उन्नत कृषि तकनीक, फसल उत्पादन बढ़ाने के आधुनिक तरीके, मिट्टी स्वास्थ्य प्रबंधन, संतुलित उर्वरक उपयोग और बदलते मौसम के अनुरूप खेती पर विशेष जोर दिया गया. किसानों ने अपनी समस्याएं विशेषज्ञों के सामने रखी, जिनका मौके पर ही समाधान बताया गया.

किसान कारवां के पहले चरण में कृषि विभाग के एडीओ नितेंद्र कुमार ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि कई किसान अभी भी योजना का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं. ऐसे किसानों को फार्मर रजिस्ट्री के माध्यम से लाभ दिलाने की प्रक्रिया समझाई गई.

दूसरे चरण में पशुपालन विभाग के पशु चिकित्सक डॉ. अनिरुद्ध सिंह ने पशुपालन से जुड़ी सरकारी योजनाओं की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि केवल पशु आहार पर्याप्त नहीं है, बल्कि पशुओं को मिनरल मिक्सचर, खाने वाला सोडा और नमक देना जरूरी है, जिससे पशु स्वस्थ रहेंगे और दूध उत्पादन में वृद्धि होगी.

तीसरे चरण में कृषि विज्ञान केंद्र औरैया की महिला वैज्ञानिक डॉ. रश्मि यादव ने वैल्यू एडिशन पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि किसान यदि गेहूं से दलिया, आटा या अन्य उत्पाद बनाएं तो अतिरिक्त आमदनी कमा सकते हैं.

चौथे चरण में चंबल फर्टिलाइजर लिमिटेड के एरिया मैनेजर मुकेश मेहता ने बताया कि के.के. बिरला ग्रुप की यह कंपनी किसानों के साथ विश्वास के साथ जुड़ी हुई है. उन्होंने कंपनी के प्रमुख उत्पाद उत्तम प्रणाम और उत्तम माइको राजा के फायदे गिनाए.

पांचवें चरण में सहायक तकनीकी प्रबंधक निशांत चतुर्वेदी ने केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि बीज मिनिकिट योजना के लिए आगामी जायद फसल के लिए रजिस्ट्रेशन जरूरी है. साथ ही यंत्रीकरण योजना में 80 प्रतिशत तक सब्सिडी मिलने की जानकारी दी गई.

छठे चरण में ग्राम प्रधान मोहित सिंह ने किसानों का सम्मान किया. उन्होंने कहा कि किसान अन्नदाता है और देश के हर नागरिक तक अनाज पहुंचाने का काम किसान ही करता है, इसलिए उसका सम्मान सर्वोपरि है.

सातवें और अंतिम चरण में लकी ड्रॉ का आयोजन किया गया, जिसमें 500 रुपये के 10 पुरस्कार दिए गए. द्वितीय पुरस्कार के रूप में हर नारायण को 2000 और प्रथम पुरस्कार के रूप में बलराम को 3000 रुपये की पुरस्कार राशि दी गई.
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