
महाराष्ट्र के जालना जिले से एक दिल दहला देने वाली तस्वीर सामने आई है, जहां मौसंबी उत्पादक किसान की बेबसी और लाचारी साफ नजर आ रही है. बाजार में मौसंबी को लगातार कम दाम मिलने से परेशान होकर किसान ने अपने ही हाथों से मेहनत की कमाई को मिट्टी में मिला दिया.

जालना जिले के अंबड तहसील के कर्जत गांव के किसान अशोक डोंगरे ने लगभग 6 वर्षों से संजोई गई मौसंबी की बाग को जेसीबी से नष्ट कर दिया. अशोक डोंगरे ने करीब 6 साल पहले अपनी 4 एकड़ जमीन पर लगभग 300 से 350 मौसंबी के पेड़ लगाए थे.

शुरुआत में अच्छी उम्मीद थी कि मौसंबी की खेती से आर्थिक स्थिरता मिलेगी, लेकिन बीते कुछ वर्षों से मौसंबी के दामों में भारी गिरावट आई है. बाजार में उचित भाव नहीं मिलने के कारण उत्पादन लागत तक नहीं निकल पा रही थी.

इसके साथ ही फसलों पर रोगों का प्रकोप, फलों का गिरना, खाद-दवाइयों का बढ़ता खर्च, पानी और मजदूरी की बढ़ती लागत ने किसान की कमर तोड़ दी. कर्ज का बोझ बढ़ता गया और सरकारी योजनाओं का लाभ भी समय पर नहीं मिल सका.

किसान ने बताया कि उनको अपनी 6 साल की मेहनत पर पानी फिर गया है. उन्होंने कहा कि अच्छी क्वालिटी की मौसंबी होने के बावजूद भी उन्हें फसल का अच्छा भाव नहीं मिल रहा है. उन्होंने कहा कि मार्केट में जाने के बाद व्यापारी बोलते हैं हरा माल लाओ, हरा ले जाने पर बोलते हैं पीला ले आओ, जिससे परेशान होकर फसल पर जेसीबी चलाना पड़ रहा है.

आखिरकार मानसिक और आर्थिक तनाव से जूझ रहे किसान ने मजबूर होकर पूरी मौसंबी की बाग को जेसीबी से उखाड़ फेंका. यह घटना न सिर्फ एक किसान की पीड़ा को दर्शाती है, बल्कि मौसंबी उत्पादक किसानों की गंभीर स्थिति पर भी सवाल खड़े करती है.

किसान मांग कर रहे हैं कि सरकार मौसंबी को न्यूनतम समर्थन मूल्य दे और किसानों को राहत पहुंचाए, ताकि किसानों को उनकी मेहनत और लागत का पैसा मिल सके. किसान अशोक डोंगरे ने भी कहा कि सरकार को मौसंबी न्यूनतम समर्थन मूल्य देना चाहिए. (गौरव विजय साली की रिपोर्ट)
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