कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक पोल्ट्री फार्मर एक ऐसी परेशानी से जूझ रहे हैं. परेशानी भी ऐसी कि काम करें तो नुकसान और ना करें तो परिवार का पेट भरने के लिए खाना कहां से लाए. विरोध में आवाज उठाएं तो काम नहीं मिलता. फार्मर को शोषण और नुकसान से बचाने के लिए केन्द्र सरकार की पॉलिसी भी है, लेकिन उसका भी पालन नहीं हो रहा है. कोढ़ में खाज वाली स्थिति ये है कि फार्मर की बात कोई सुनने तक को तैयार नहीं है. लेकिन जब उन्हें मौका मिला तो उन्होंने अपनी पीढ़ा मत्स्य पशुपालन और डेयरी केन्द्रीय राज्यमंत्री संजीव बालियान के सामने रख दी.
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