आज जब बाजार में प्याज का दाम 80 रुपये किलो तक पहुंच गया है और किसानों को दो पैसे मिल रहे हैं तो नफेड नाम की सहकारी एजेंसी सिर्फ 25 रुपये किलो पर प्याज बेच रही है, ताकि इसका दाम जल्दी से जल्दी गिर जाए और कंज्यूमर को राहत मिले. नफेड की इस नीति से कंज्यूमर को तो फायदा मिल जाएगा लेकिन यह फायदा किसान की जेब काटकर दिया जाएगा. जबकि नफेड किसानों के फायदे के लिए बनाया गया था. लेकिन अब इसे किसान अपना दुश्मन समझने लगे हैं. नफेड की नीतियों से किसानों का नुकसान हो रहा है. अगर महाराष्ट्र के किसान इस पर ऐसे आरोप लगा रहे हैं तो उसका आधार क्या है? इस वीडियो में इसे समझते हैं.
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