सूखे और फसल नुकसान के बीच बीड में 8 दिन में 3 किसानों की मौत, मराठवाड़ा में गहराया कृषि संकट

सूखे और फसल नुकसान के बीच बीड में 8 दिन में 3 किसानों की मौत, मराठवाड़ा में गहराया कृषि संकट

महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में बारिश की कमी और फसल नुकसान के बीच किसानों का संकट गहरा गया है. बीड जिले में करीब आठ दिनों के दौरान तीन किसानों की आत्महत्या के मामले सामने आए हैं. क्षेत्र में सोयाबीन, कपास और मक्का की फसल प्रभावित होने के बीच किसान जल्द राहत और आर्थिक सहायता की मांग कर रहे हैं.

Advertisement
सूखे और फसल नुकसान के बीच बीड में 8 दिन में 3 किसानों की मौत, मराठवाड़ा में गहराया कृषि संकटमहाराष्‍ट्र में सूखे का गंभीर संकट

महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में बारिश की कमी और खरीफ फसलों के नुकसान के बीच किसानों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. बीड जिले में पिछले करीब आठ दिनों के दौरान तीन किसानों की आत्महत्या के मामले सामने आने के बाद कृषि संकट एक बार फिर चर्चा में है. ताजा आंकड़ों के मुताबिक, बीड में जनवरी से सितंबर 2026 के दौरान किसान आत्महत्या के मामलों की संख्या बढ़कर 168 हो गई है.

मराठवाड़ा में लंबे समय तक बारिश नहीं होने से सोयाबीन, कपास और मक्का जैसी खरीफ फसलें प्रभावित हुई हैं. सितंबर के आखिर में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, क्षेत्र में 50 दिनों से ज्यादा समय तक बारिश नहीं होने के कारण स्थिति गंभीर हुई और संभाग की 75 में से 38 तहसीलों में सामान्य की 75 प्रतिशत से भी कम बारिश दर्ज की गई. खास तौर पर हल्की जमीन की फसलों को ज्यादा नुकसान पहुंचने की बात सामने आई.

बीड में आठ दिन के भीतर तीन मामले

दिए गए इनपुट के अनुसार, बीड जिले में हाल के दिनों में अंबाजोगाई तालुका के राडी गांव के किसान सतीश कोलगिरे, साकुड के संतराम चाटे और परली तालुका के दादाहारी वडगांव के शिवाजीराव शिंदे की आत्महत्या के मामले सामने आए हैं.

सतीश कोलगिरे से जुड़े मामले की 27 सितंबर की एक रिपोर्ट में फसल नुकसान और कर्ज के दबाव का जिक्र किया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, अंबाजोगाई तहसील के राडी गांव में यह घटना सामने आई थी. इसी अवधि में हिंगोली और लातूर में भी एक-एक किसान की आत्महत्या के मामले सामने आए हैं.

मराठवाड़ा में 8 महीने में 653 मामले

किसानों के संकट की गंभीरता मराठवाड़ा के आंकड़ों से भी सामने आती है जनवरी से जून 2026 के दौरान पूरे मराठवाड़ा में 465 किसान आत्महत्या के मामले दर्ज किए गए थे. उस समय छत्रपति संभाजीनगर में सबसे अधिक 109 और बीड में 95 मामले दर्ज थे.

इसके बाद मामलों की संख्या और बढ़ी. सितंबर के आखिर में सामने आई विभागीय आयुक्त कार्यालय की रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी से अगस्त के आठ महीनों में मराठवाड़ा में यह आंकड़ा 653 तक पहुंच गया था. इनमें 363 मामलों को सरकारी सहायता के लिए पात्र माना गया, 232 मामलों की जांच चल रही थी और 58 आवेदन खारिज किए गए थे. इस रिपोर्ट के मुताबिक अगस्त तक बीड में 149 और छत्रपति संभाजीनगर में 138 मामले दर्ज थे.

बीड में आंकड़ा लगातार बढ़ा है. जून तक जिले में 95 मामले दर्ज थे. सितंबर के आखिर की उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार जुलाई तक यह संख्या 123 और अगस्त तक 149 हो गई थी. दिए गए ताजा इनपुट में जनवरी से सितंबर तक बीड का आंकड़ा 168 बताया गया है.

सोयाबीन, कपास और मक्का की फसल पर मार

इस संकट के पीछे बारिश की लंबी कमी को बड़ी वजह बताया जा रहा है. बारिश नहीं होने से हल्की जमीन पर बोई गई सोयाबीन, कपास और मक्का की फसलों को गंभीर नुकसान हुआ है, जबकि मध्यम जमीन पर लगी फसलों की स्थिति भी खराब होने की बात सामने आई है. धाराशिव, परभणी, लातूर और बीड में स्थिति गंभीर बताई गई है.

प्रभावित किसानों का सवाल अब मुआवजे और तत्काल आर्थिक सहायता को लेकर है. इनपुट के मुताबिक किसानों ने सरकार से जल्द सहायता की घोषणा की मांग करते हुए बैलगाड़ी के साथ आंदोलन भी शुरू किया है.

खेतों तक पहुंचे नेता, किसानों को राहत का इंतजार

कृषि संकट के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस समेत राज्य के कई नेताओं के मराठवाड़ा के प्रभावित इलाकों के दौरे की खबर है. अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं ने खेतों में पहुंचकर फसलों के नुकसान का जायजा लिया है.

वहीं, बीड के प्रशासन की ओर से किसानों से धैर्य बनाए रखने की अपील की गई है. बीड कलेक्टर विवेक जॉनसन ने किसानों को भरोसा दिलाया कि प्रशासन उनके साथ है और अधिकारी खेतों में जाकर नुकसान का निरीक्षण कर रहे हैं. प्रशासन की ओर से चारा और पानी की व्यवस्था करने की बात भी कही गई है.

किसान संगठनों ने जल्द फैसले की मांग की

किसान संगठनों का कहना है कि राहत के फैसलों को तेजी से जमीन पर उतारने की जरूरत है. अखिल भारतीय किसान सभा के राज्य उपाध्यक्ष अजय बुरांडे ने सरकार से जल्द निर्णय लेने और उसे लागू करने की मांग की है.

वहीं, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के खरात गुट से जुड़े अक्षय भुम्बे ने भी फसल नुकसान से जूझ रहे किसानों को जल्द सहायता देने की मांग उठाई है.

मराठवाड़ा में किसान आत्महत्या का संकट नया नहीं है. साल 2025 में भी क्षेत्र में 1,131 किसान आत्महत्या के मामले दर्ज हुए थे. 2026 के शुरुआती छह महीनों में ही संख्या 465 तक पहुंच चुकी थी. अब बारिश की कमी और खरीफ फसलों को हुए नुकसान ने किसानों की आर्थिक मुश्किलें और बढ़ा दी हैं.

फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित किसानों तक राहत पहुंचाने और आर्थिक संकट से जूझ रहे परिवारों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने की है.

POST A COMMENT