Agriculture Live Blogभारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अपने ताजा पूर्वानुमान में जानकारी दी है कि देश के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज अगले कुछ दिनों तक बिगड़ा रहेगा. ओडिशा, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और पूर्वोत्तर भारत में 24 मार्च तक गरज-चमक, तेज हवाएं और बारिश जारी रहने की संभावना है. 22 मार्च को पूर्वोत्तर राज्यों असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में हल्की से मध्यम बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाएं चलने की संभावना है. वहीं, पूर्वी भारत में बिहार, झारखंड और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल व सिक्किम में बारिश और आंधी का असर जारी रहेगा.
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में मार्च महीने में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने अफीम की खेती करने वाले किसानों की कमर तोड़ दी है. तेज बारिश के कारण तैयार फसल खेतों में गिर गई और पोस्ते के फल काले पड़ गए हैं. गीले खेतों में गिरी फसल के सड़ने का खतरा बढ़ गया है, जिससे दाने निकालना बेहद मुश्किल हो गया है. अप्रैल और मई में किसानों को अफीम की फसल काटकर सरकार को निर्धारित मात्रा में देना होता है, लेकिन इस बार बारिश के कारण डोडा खराब होने लगा है. दाने कमजोर हो गए हैं, जिससे पूरी फसल मिलना मुश्किल है. जिले में करीब 3 हजार किसान अफीम की खेती करते हैं, जो अब भारी नुकसान झेल रहे हैं. किसानों का कहना है कि फसल खराब होने के बावजूद सरकारी अधिकारी उनकी समस्या पर ध्यान नहीं दे रहे हैं.
बिहार के सहरसा जिले में बीते शुक्रवार रात आंधी, तेज बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों का कमर तोड़ दिया. लहलहाती गेहूं, मकाई, तेलहन और दलहन की फसल खेतों में क्षतिग्रस्त हो गई और दूर-दूर तक गिरे पड़े दिखाई दे रहे हैं. जिले के कहरा प्रखंड के भरौली क्षेत्र की रबी फसल भी इसी हालत में है. किसान बताते हैं कि उन्होंने ऋण लेकर मेहनत की थी, लेकिन अचानक आई आंधी और बारिश ने फसल बर्बाद कर दी. अब उनका आर्थिक संकट बढ़ गया है और वे सरकार से उचित मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं.
राजस्थान के धौलपुर जिले की कृषि मंडी में हालात काफी खराब हो गए हैं. यहां किसानों को अपनी फसल बेचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. पहले मंडी में जांच के लिए दो लैब काम कर रही थीं, लेकिन दो दिन पहले एक लैब खराब हो गई. जिसके बाद अब सारा काम सिर्फ एक ही लैब से किया जा रहा है. इस वजह से मंडी में किसानों की भीड़ बढ़ गई है और उन्हें घंटों लंबी लाइन में खड़ा रहना पड़ रहा है. इससे किसानों का समय भी खराब हो रहा है और उन्हें काफी परेशानी भी उठानी पड़ रही है. इससे नाराज होकर किसानों ने मंडी प्रशासन के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया.
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बांदा, यूपी के मोतियारी गांव में एक किसान उदय प्रताप (45) की मौत बेमौसम बारिश और फसल नुकसान के कारण हुई. खेत की खराब होती फसल देखकर वह सदमे में लौटे और अचानक अटैक पड़ने से उनका निधन हो गया. परिजन ने बताया कि पिछले साल बेटी की शादी हुई थी और काफी कर्ज भी था, इसलिए फसल गिरने से चिंता बढ़ गई. दो बेटे और दो बेटियों के पिता उदय प्रताप की मौत से घर में कोहराम मच गया. पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा और तहसीलदार ने मौके पर जांच शुरू कर दी.
परंपरागत खेती के साथ-साथ आधुनिक कृषि और बागवानी, विशेष रूप से आम और केले की खेती के लिए पहचान रखने वाले बस्ती जनपद में ‘किसान तक’ के किसान कारवां का 46वां पड़ाव पहुंचा. जनपद के बहादुरपुर ब्लॉक अंतर्गत पिपरा गौतम गांव में किसान कारवां कार्यक्रम का आयोजन किया गया. उत्तर प्रदेश सरकार और इंडिया टुडे ग्रुप की संयुक्त पहल के तहत प्रदेश के 75 जिलों में चल रहे इस विशेष अभियान में बड़ी संख्या में महिला और पुरुष किसानों ने भाग लिया और खेती से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल कीं. बस्ती में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी और योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की.

मंडी जिला के कोटली उपमंडल में तीन दिन की बारिश के बाद भरभरा कर पहाड़ी गिरने से गांव पर खतरा मंडरा गया है. इस भीषण लैंडस्लाइड के लाइव वीडियो भी सामने आएं है. जिसमें कुछ लोगों की चिल्लाने की आवाजें सुनायी पड़ रही हैं. कोटली उपमंडल के तहत सुराडी ग्राम पंचायत के रोपडू गांव में यह घटना पेश आई है. इस भीषण लैंडस्लाइड की चपेट में आने से एक गौशाला पूरी तरह जमीदोंज हो गयी है.

जम्मू-कश्मीर की भलैसा घाटी में ताजा बर्फबारी के बाद खूबसूरत नज़ारे देखने को मिले. चारों ओर बर्फ की सफेद चादर बिछ गई है, जिससे इलाके की सुंदरता और बढ़ गई है. वहीं, लगातार हो रहे हिमपात के चलते तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे ठंड और बढ़ गई है.
हल्की बारिश के पूर्वानुमान को देखते हुए किसानों को छिड़काव न करने और फसलों का सही प्रबंधन रखने की सलाह दी गई है. कटी फसल को बांधकर व ढककर रखें ताकि हवा व बारिश से नुकसान न हो. पकी सरसों/तोरिया की जल्द कटाई और गहाई करें. मूंग-उड़द की बुवाई के लिए उन्नत बीज लेकर उपचार करें. सब्जियों की बुवाई व रोपाई के लिए मौसम अनुकूल है. प्याज, टमाटर और बैंगन में कीटों की निगरानी व नियंत्रण जरूरी है. मक्का, लोबिया व बेबी कॉर्न की बुवाई भी की जा सकती है. आम-नींबू में फूल के समय सिंचाई से बचें और कीटों पर नजर रखें.
दुनियाभर में हर साल 22 मार्च को विश्व जल दिवस मनाया जाता है. यह दिन हमें याद दिलाता है कि पानी सिर्फ एक संसाधन नहीं, बल्कि जीवन की बुनियाद है. इस साल की थीम पानी और लैंगिक समानता से जुड़ी है, यानी जहां पानी की सही पहुंच होती है, वहां जिंदगी भी बेहतर होती है. ऐसे में जब पानी की कमी लगातार बढ़ रही है, खेती में इसका समझदारी से इस्तेमाल करना और भी जरूरी हो गया है. अब इस काम में नई तकनीक, खासकर AI और सेंसर, किसानों के लिए मददगार बनकर सामने आ रहे हैं. आज भी देश के ज्यादातर किसान सिंचाई के लिए अपने अनुभव और अंदाज पर भरोसा करते हैं. कई बार यह तरीका काम कर जाता है, लेकिन कई बार जरूरत से ज्यादा पानी खेत में चला जाता है या फिर कम पड़ जाता है. इसका असर सीधा फसल और पानी दोनों पर पड़ता है. यहीं से सेंसर आधारित सिंचाई की जरूरत महसूस होती है.
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दिल्ली-एनसीआर में इन दिनों मौसम काफी सुहावना बना हुआ है. मार्च में भी लोगों को हल्की ठंड महसूस हो रही है और गर्मी अभी नजर नहीं आ रही. धूप हल्की रहती है और 15–25 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चल रही हैं. मौसम विभाग के अनुसार 27 मार्च तक ऐसा ही मौसम बना रहेगा और तापमान में ज्यादा बदलाव नहीं होगा. यानी लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी. आज 22 मार्च को अधिकतम तापमान करीब 31°C और न्यूनतम 13–14°C रहेगा. दिन में हल्की धूप, चलती हवाएं और बीच-बीच में बादल रहेंगे, जिससे मौसम आरामदायक बना रहेगा.
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