खाद्य तेल आयात (सांकेतिक तस्वीर)नेपाल से वनस्पति तेल जैसे सोयाबीन और पाम तेल समेत अन्य तेलों के आयात से भारतीय खाद्य तेल उद्योग के हितधारकों- व्यापारियों, रिफाइनरी मालिकों और किसानों को नुकसान का सामना करना पड़ रहा है. दरअसल, नेपाल से आने वाले ये खाद्य तेल आयात शुल्क न लगने के कारण सस्ती दर पर भारत पहुंच रहे हैं. इससे घरेलू उत्पादकों और हितधारकों को फसल के भाव कम होने से दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. पहले भारतीय वनस्पति तेल उत्पादक संघ (IVPA) ने सरकार से नेपाल से आने वाले खाद्य तेल पर लिमिट लगाने की मांग की थी. लेकिन अब IVPA ने नेपाल जाने वाले सभी खाद्य तेलों के लिए एंट्री पोर्ट (बंदरगाह) को बदलने की मांग की है.
बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, IVPA ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर नेपाल से वनस्पति तेलों के आयात पर अंकुश लगाने के उपायों की सिफारिश की है. आईवीपीए के अध्यक्ष सुधाकर देसाई ने पत्र के माध्यम से नेपाल जाने वाले सभी खाद्य तेलों के लिए एंट्री पोर्ट को बदलने की जरूरत बताई है.
रिपोर्ट के मुताबिक, अभी नेपाल जाने वाले सभी खाद्य तेलों के आयात के लिए हल्दिया पोर्ट का इस्तेमाल किया जा रहा है. ऐसे में एक ही बंदरगाह पर यातायात के इस संकेन्द्रण के कारण इसे चलाने से जुड़ी कई चुनौतियां पैदा हुई हैं. इसके कारण गंभीर भीड़भाड़ और जहाज़ों के बर्थिंग में देरी, लंबे समय तक इंतजार करने के कारण आयातकों को उच्च विलंब शुल्क लागत और भंडारण टैंकों की सीमित उपलब्धता जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
इससे समय पर अनलोडिंग और हैंडलिंग पर असर पड़ता है. ये फैक्टर बंदरगाह पर ड्राफ्ट बैन जहाजों की टर्नअराउंड दक्षता को और बढ़ा देते हैं. सुधाकर देसाई ने कहा कि नेपाल भेजे जाने वाले तेल के लिए फिक्स किए गए बंदरगाह को हल्दिया से विशाखापट्टनम जैसे बंदरगाहों पर शिफ्ट करने की जरूरत है. ऐसा होने से हल्दिया बंदरगाह पर में जहाजों की भीड़ कम होगी. इससे नेपाल और घरेलू दोनों तरह के माल की सप्लाईचेन एफिशिएंसी में सुधार होगा.
दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र (SAFTA) समझौते के तहत नेपाल से भारत में आयातित खाद्य तेलों पर कोई आयात शुल्क नहीं लगता. इसी का फायदा उठाकर व्यापारी बड़ी मात्रा में सस्ते दर पर खाद्य तेल भारत भेज रहे हैं. सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के कार्यकारी निदेशक बीवी मेहता ने कहा, “सरकार को नेपाल से आयात होने वाले खाद्य तेलों पर मासिक कोटा तय करना चाहिए ताकि इस कर छूट का दुरुपयोग न हो सके.” उन्होंने बताया कि नेपाल से आने वाला तेल घरेलू तेल की तुलना में 10-15 प्रतिशत सस्ता बिक रहा है.
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