दालों के ड्यूटी फ्री इंपोर्ट की समय सीमा बढ़ेगीइस साल अल नीनो के अनुमान और ईरान युद्ध से प्रभावित सप्लाई को देखते हुए भारत सरकार दालों जैसे कि अरहर (Tur) और उड़द (Urad) के लिए ड्यूटी फ्री इंपोर्ट की सीमा को बढ़ाने पर विचार कर रही है. अरहर और उड़द के लिए ड्यूटी फ्री इंपोर्ट की समय सीमा 31 मार्च को समाप्त हो रही है, जबकि कारोबारी इसे आगे बढ़ाने की उम्मीद कर रहे हैं, क्योंकि भारत में इन दालों की कमी है. एक और कारण है जिससे ड्यूटी फ्री इंपोर्ट को बढ़ाया जा सकता है, वह है मौजूदा फसल वर्ष (जो जून तक चलता है) के दौरान घरेलू उत्पादन में आई गिरावट.
दूसरे अग्रिम अनुमानों के अनुसार, 2025-26 के दौरान अरहर का उत्पादन पिछले साल के 36.24 लाख टन (lt) की तुलना में 4.66 प्रतिशत घटकर 34.55 लाख टन रह गया है. इसी तरह, खरीफ के मौसम में उड़द का उत्पादन 10.7 प्रतिशत घटकर 12.06 लाख टन (पहले 13.41 लाख टन) और रबी के मौसम में 8.14 प्रतिशत घटकर 5.08 लाख टन (पहले 5.53 लाख टन) रह गया. "युद्ध के माहौल में सरकार पहले से ही महंगाई को लेकर चिंतित है, क्योंकि तेल की बढ़ती कीमतों के कारण माल ढुलाई और बीमा की लागत बढ़ने की आशंका है.
हालांकि सप्लाई में कोई रुकावट नहीं आ सकती है, लेकिन शिपिंग कंपनियां लड़ाई को देखते हुए प्रीमियम (war-risk premiums) बढ़ा सकती हैं, जिससे आयात की कुल लागत में वृद्धि होगी. रुपये के मूल्य में गिरावट भी लागत में वृद्धि का एक कारण बन रही है. यहां तक कि पैकेजिंग का खर्च भी काफी बढ़ गया है. PP (पॉलीप्रोपाइलीन) बैग की कीमतें एक सप्ताह के भीतर ही 11 रुपये से बढ़कर 23 रुपये हो गई हैं, जिससे प्रति टन लागत में लगभग 250 रुपये की वृद्धि हुई है. भारत में दालों की कमी बनी हुई है, सरकार को आयात पर प्रतिबंध लगाने से बचना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आयात जारी रहे," इंडिया पल्सेस एंड ग्रेन्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बिमल कोठारी ने कहा.
जहां अरहर और उड़द का आयात शुल्क-मुक्त है, वहीं चना और मसूर (Lentils) जैसी दालों पर 10 प्रतिशत और पीली मटर (Yellow Peas) पर 30 प्रतिशत का शुल्क लगता है. कोठारी ने कहा कि दालों के व्यापार से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि सरकार इसी नीति को जारी रखेगी, क्योंकि इस नीति के कारण घरेलू स्तर पर सभी दालों की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं. उन्होंने कहा कि सरकार को इस मौके का इस्तेमाल करके मजबूत बफर स्टॉक बनाना चाहिए, क्योंकि चने और मसूर की घरेलू फसलें अच्छी हैं.
IPGA के सेक्रेटरी सतीश उपाध्याय ने कहा कि दालों के आयात की नीति में विस्तार की उम्मीद है, जो अगले हफ्ते तक आ सकता है. उन्होंने कहा कि अल नीनो के आने और मॉनसून पर असर को देखते हुए सरकार को महंगाई को काबू में रखने के लिए इंपोर्ट फ्री आयात की अनुमति देनी चाहिए. IGrain India के राहुल चौहान ने कहा कि सरकार द्वारा अरहर और उड़द के शुल्क-मुक्त आयात को बढ़ाने की संभावना है, क्योंकि इस साल घरेलू उत्पादन पिछले साल की तुलना में कम है.
साल 2025 के दौरान भारत का दालों का आयात पिछले वर्ष के 68.75 लाख टन (lt) की तुलना में थोड़ा कम होकर 65.69 लाख टन रह गया. इसकी मुख्य वजह पीली मटर के आयात में आई कमी थी, जबकि उड़द, चना और अरहर की विदेशी खरीद में बढ़ोतरी दर्ज की गई.
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