राजस्थान का इलेक्शन कारवां ऐसे-ऐसे मुद्दों को छूने की कोशिश कर रहा है जिन पर राजनीति सीधे तौर पर कभी बात नहीं करती. अलवर से भरतपुर जाते हुए सड़क किनारे रेवड़ चरा रहे लोगों से हमने बात की. उन्होंने बताया कि अब भेड़पालन मुश्किल काम हो गया है. ना तो भेड़ों के चरने के लिए जगह बची है और ना ही उन्हें लाने के लिए रास्ते. क्योंकि गांव में चारागाहों पर कब्जे हो गए हैं. रास्तों में तारबंदी और दीवारों के कारण भेड़ों के प्राकृतिक रास्ते बंद हो गए हैं. वहीं, भेड़ पालकों को ना तो कोई सरकारी सुविधाएं मिलती हैं और ना ही कभी कोई पहल सरकार की ओर से की जाती है. देखिए ये वीडियो
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