किसी भी चीज के उपभोग में उससे जुड़े लोगों को कम से कम परेशानी और दर्द का सामना करना पड़े, ये मानना है पीपल फार्म (Peepal Farm) के संचालक रॉबिन सिंह का. युवा अवस्था में ही अमेरिका में घर और कंपनी खड़ी कर डॉलरों में कमाई करने वाले रॉबिन सिंह आज सब कुछ छोड़कर कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश के एक छोटे से गांव में पीपल फार्म को नई ऊंचाईयां दे रहे हैं. दर्द-परेशानी इंसान की हो या प्रकृति की या फिर जानवरों की, तीनों ही रॉबिन सिंह के लिए बराबर हैं. यही वजह है कि जब रॉबिन सिंह धनौटू गांव में अपना घर यानि पीपल फार्म बना रहे थे तो इसके लिए उन्होंने अपने खेत की मिट्टी और शहर के कबाड़ को सबसे बेहतर पाया. रॉबिन चाहते थे कि लकड़ी के लिए नए पेड़ न काटने पड़ें इसलिए कुछ पुरानी बिल्डिंग की लकड़ी खरीद ली. मकानों में 90 फीसद लकड़ी पुरानी लगी हुई है.
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