
हाल ही में जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.4% रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के 6.5% के मुकाबले एक बड़ा सुधार है. वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन की विकास दर 3.1फीसदी रहने का अनुमान है देश की कुल जीडीपी अब लगभग 201.90 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है. यह वृद्धि दर्शाती है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था सही दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है. इस तरक्की में सबसे बड़ा हाथ सर्विस सेक्टर का है, जो बैंकिंग और रियल एस्टेट के दम पर 9.9% की दर से बढ़ रहा है, जबकि उद्योग क्षेत्र में भी 7.0% की मज़बूत वृद्धि देखी जा रही है.भारत की लगभग 46% आबादी आज भी अपनी आजीविका के लिए सीधे तौर पर कृषि पर निर्भर है.अच्छी बारिश और सरकारी मदद ने पिछले साल की मंदी के बाद इस क्षेत्र में नई जान फूंक दी है.
वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन की विकास दर 3.1% रहने का अनुमान है. हालांकि यह आंकड़ा उद्योगों की तुलना में छोटा लग सकता है, लेकिन जीडीपी में कृषि का कुल योगदान 15-18% के आसपास है. जब गांवों में किसानों की कमाई बढ़ती है, तो बाजार में ट्रैक्टर, मोबाइल और कपड़ों जैसी चीजों की मांग बढ़ जाती है, जिससे पूरा देश मजबूत होता है. मानसून की मेहरबानी और 'स्मार्ट खेती' का नया दौर भारतीय कृषि के लिए मानसून किसी वरदान से कम नहीं है और इस साल अनुकूल बारिश ने खेतों में नई जान फूंक दी है। खरीफ फसलों की बुवाई का क्षेत्रफल बढ़कर 110.5 मिलियन हेक्टेयर तक पहुॆच गया है, जो बम्पर पैदावार का साफ संकेत है,लेकिन आज की खेती सिर्फ बारिश पर निर्भर नहीं है; अब इसमें 'स्मार्ट एग्रीकल्चर' का तड़का भी लग चुका है। ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी तकनीकें लागत घटाकर उत्पादन बढ़ा रही हैं.
इसके साथ ही, डेयरी और मछली पालन जैसे क्षेत्रों ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई विविधता और मजबूती दी है, जिससे कृषि जीडीपी की चमक बढ़ी है.खाद्य प्रसंस्करण आज भारतीय खेती के लिए सबसे बड़ा क्रांतिकारी कदम साबित हो रहा है। यह कच्चे कृषि उत्पादों को 'वैल्यू ऐडेड' उत्पादों में बदलकर उनकी कीमत और उम्र दोनों बढ़ा देता है—जैसे टमाटर से सॉस या दूध से पनीर बनाना. विनिर्माण क्षेत्र में लगभग 10% का योगदान देने वाला यह सेक्टर 8-9% की तेज रफ़्तार से बढ़ रहा है.प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना' और मेगा फूड पार्कों के जरिए सरकार न केवल फसलों की बर्बादी रोक रही है, बल्कि भारतीय किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़कर उन्हें एक 'बिजनेसमैन' के रूप में स्थापित कर रही है.
भारत सरकार खेती को लाभदायक बनाने के लिए 'पीएम-किसान' जैसी योजनाओं के जरिए किसानों के बैंक खातों में सीधी आर्थिक मदद पहुंचा रही है. वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में इस योजना के लिए 63,500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. सरकार का मुख्य फोकस 'फसल कटाई के बाद के प्रबंधन' पर है ताकि उपज खराब न हो. भारत अब दुनिया को अनाज खिला रहा है; इस साल की पहली तिमाही में कृषि निर्यात में 7.1% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. चावल, फल और मांस के निर्यात से देश को भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा प्राप्त हो रही है, जो हमारी अर्थव्यवस्था को और मजबूती प्रदान करती है
इतनी प्रगति के बावजूद कृषि क्षेत्र के सामने जलवायु परिवर्तन और मानसून की अनिश्चितता जैसी बड़ी चुनौतियां हैं. उत्पादन लागत का बढ़ना और छोटे किसानों तक आधुनिक तकनीक की पहुंच न होना आज भी एक समस्या है. भारत को $5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाने के सपने को पूरा करने के लिए कृषि क्षेत्र का सशक्त होना अनिवार्य है. जीडीपी में कृषि का योगदान केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि देश की खुशहाली और स्थिरता में छिपा है. यदि हमारे किसान सशक्त होंगे और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों को और बढ़ावा मिलेगा, तो भारत की आर्थिक रफ़्तार को रोकना नामुमकिन होगा. सरल शब्दों में, लहलहाते खेत ही विकसित भारत की असली पहचान हैं.
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