मुजफ्फरपुर के मोतीपुर स्थित डिस्टिलरी उद्योगकेंद्र सरकार की इथेनॉल आपूर्ति नीति में किए गए बदलाव ने बिहार के इथेनॉल उद्योग को गंभीर संकट में डाल दिया है. इसका सीधा असर मुजफ्फरपुर जिले के मोतीपुर औद्योगिक क्षेत्र में संचालित इथेनॉल प्लांटों पर पड़ा है. इथेनॉल सप्लाई ऑर्डर में 50 प्रतिशत कटौती के बाद कुछ प्लांट आंशिक या पूरी तरह बंद हो गए हैं, जिससे करीब हजारों श्रमिक परिवारों की आजीविका पर संकट मंडराने लगा है. मुजफ्फरपुर के मोतीपुर मे जब उद्योग विभाग ने औद्योगिक क्षेत्र घोषित किया, तब यहां इथेनॉल उद्योग की नई शुरुआत हुई थी.
इसके बाद जिले में चार इथेनॉल प्लांट स्थापित किए गए, जिससे हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला. लेकिन, अब केंद्र सरकार की नई इथेनॉल नीति के चलते यह उद्योग बंद होने के कगार पर पहुंच गया है. मोतीपुर औद्योगिक क्षेत्र में स्थित भारत ऊर्जा बायोफ्यूल्स इथेनॉल प्राइवेट लिमिटेड का प्लांट सरकारी नीति में बदलाव के कारण पिछले 15 दिनों से पूरी तरह बंद है.
इथेनॉल सप्लाई ऑर्डर में 50 प्रतिशत कटौती के चलते कंपनी के लगभग तीन सौ कामगार बेरोजगार हो चुके हैं. कंपनी के चेयरमैन और सीएमडी शुभम सिंह के अनुसार, जनवरी महीने में उत्पादन पूरी तरह ठप रहेगा और एक फरवरी से दोबारा काम शुरू करने की योजना है. उन्होंने स्पष्ट कहा कि आधी क्षमता पर प्लांट चलाना व्यावहारिक नहीं है और इससे कंपनी को करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है. शुभम सिंह का कहना है कि नया अलोकेशन आया है. इथेनॉल साइकिल यह नवंबर से शुरू होकर अक्टूबर तक चलता है.
अक्टूबर में यह अलोकेशन आया कि फिफ्टी परसेंट से ज्यादा हमसे नहीं खरीद किया जाएगा, जबकि सरकारी कंपनी ने हमसे एग्रीमेंट किया था तो फिफ्टी पर्सेंट का हंड्रेड प्रतिशत खरीद किया जाएगा और बचे हुए 50 प्रतिशत पर हमें प्राथमिकता देंगे, जो कि बीते दो साल से ले भी रहे थे.
लेकिन, अब एकदम कूलआउट कर लिया और बचा हुआ 50 प्रतिशत भी नहीं दे रहे. जब तक सरकार पूरा उत्पाद नहीं खरीदेगी, तब तक 50 प्रतिशत कटौती के साथ प्लांट चलाना संभव नहीं है. इसका असर न सिर्फ सैकड़ों कामगारों पर पड़ रहा है, बल्कि किसानों की आय भी प्रभावित हो रही है.
वहीं, इथेनॉल कंपनी में काम करने वाले श्रमिकों ने कहा कि जिस कंंपनी में दो-तीन सौ वर्कर काम करते थे, उसमें से सौ डेढ़ सौ आदमी चले गए. अभी भी परेशानी चल रही है. अब यहां काम बंद हो जाएगा तो फिर बिहार से बाहर जाना पड़ेगा.
फैक्ट्री में काम करने वाले सुजीत कुमार ने कहा कि हमलोग पहले बाहर काम करते थे यहां फैक्ट्री खुली तो ऑपरेटर की जॉब मिली. हमारे परिवार के कई लोग दूसरे डिस्लरी में काम करते है. यह बन्द होगी तो इसका काफी असर पड़ेगा.
एक अन्य वर्कर शैलेश सिंह ने कहा कि पहले बाहर काम करते थे. दो साल से जब यहां रोजगार लगा तो यहां काम करने लगे. अब बन्द हो जाएगा तो फिर बाहर जाना पड़ेगा. इससे घर परिवार सब पर असर पड़ेगा.
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today