अयोध्या में किसान कारवां, 33वां पड़ाव पूराभगवान श्री राम की जन्मभूमि अयोध्या में ‘किसान तक’ का किसान कारवां पहुंचा. 75 जिलों की विशेष कृषि यात्रा के तहत जिले के तारुण ब्लॉक के करनाईपुर गांव में 33वां पड़ाव रहा. धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के साथ-साथ अयोध्या अब कृषि क्षेत्र में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है. उपजाऊ मिट्टी और सिंचाई की बेहतर व्यवस्था के साथ जिला नकदी फसल गन्ना की खेती के साथ सब्जियों की खेती किसानों की आर्थिक आधार का बड़ा माध्यम बन चुका है. वहीं किसान कारवां कार्यक्रम के जरिए किसानों को कृषि वैज्ञानिक, कृषि विभाग, पशुपालन विभाग के अधिकारियों और सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं के साथ आधुनिक खेती से जुड़ी हुई जानकारी दी गई.
जनपद अयोध्या में जब ‘किसान तक’ का किसान कारवां पहुंचा, तो गांव के किसानों के चेहरों पर विशेष उत्साह देखने को मिला. कार्यक्रम के दौरान किसानों ने अपनी समस्याएं अधिकारियों के सामने रखीं, जिनका समाधान विभागीय अधिकारियों ने विभिन्न चरणों में किया. इसके साथ ही जेके टायर, मुथूट फाइनेंस और हार्वेस्ट पल्स के प्रतिनिधियों द्वारा अपने उत्पादों और लोगो के लिए दी जा रही सुविधाओं के बारे में जानकारी दी. कार्यक्रम के अंत में अतिथियों और प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया गया और लकी ड्रॉ के माध्यम से 12 किसानों को नकद पुरस्कार भी दिया गया. इसके साथ ही प्रगतिशील किसानों द्वारा फसलों की एक प्रदर्शनी भी आयोजित की गई. साथी उड़द का एक बीज भी किसानों के बीच वितरण किया गया.
पहले चरण में कृषि विज्ञान केंद्र अयोध्या के वैज्ञानिक पंकज कुमार सिंह ने किसानों को सब असली खेती करने का सुझाव दिया. उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती से किसान कम लागत में अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. इसके साथ उन्होंने कहा कि भविष्य की खेती प्राकृतिक खेती है और इसे किसानों को करने की जरूरत है. उन्होंने जीव अमृत और गोबर खाद के उपयोग और बनाने के तरीकों के बारे में किसानों को बताया. साथ ही उन्होंने कहा की धान की खेती से पहले किसान अपने खेतों में ढेंचा जरूर लगा ले. उन्होंने कहा कि किसानों को विशेषतौर से अयोध्या जिले के किसानों को सह फसलीय खेती गन्ना के साथ कर सकते हैं.
दूसरे चरण केवीके अयोध्या के पशुपालन वैज्ञानिक डॉ विद्यासागर ने किसानों को नन्द बाबा योजना के जरिए मिलने वाली योजनाओं के बारे में जानकारी दी. साथ ही उन्होंने बताया कि किसानों को पशुपालन में अच्छी नस्ल के गायों का चयन करना चाहिए, जिससे अच्छा दूध उत्पादन होगा. आगे उन्होंने कहा कि बकरी पालन को लेकर भी सरकार द्वारा एक करोड़ रुपए तक की योजना है जिसका लाभ किसान ले सकते हैं. बकरी पालन पर 50 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान है. साथ ही मुर्गी पालन को लेकर भी किसानों को जागरूक किया विशेष तौर से देसी नस्ल के मुर्गे के पालन करने को लेकर इन्होंने किसानों को सुझाव दिया.
तीसरे चरण में जेके टायर के प्रतिनिधि पवन यादव ने कृषि सहित ट्रैक्टरों के लिए कंपनी द्वारा श्रेष्ठ प्लस टायर उपलब्ध है. उन्होंने श्रेष्ठ प्लस टायर की खासियत के बारे में बताते हुए कहा कि अगर टायर में किसी तरह की कुछ दिक्कत आती है तो 7 साल तक कंपनी द्वारा टायर में किसी तरह गड़बड़ी पर उन्हें रिपलेसमेंट की सुविधाएं दी जाती है. वही कंपनी द्वार टायर का रिप्लेसमेंट 10 से 15 मिनट के भीतर किया जाता है.
चौथा चरण में उद्यान विभाग के सहायक उपनिरीक्षक यशवंत पटेल किसानों को बताया कि अब विभाग उद्यान विभाग की ओर से केवल बीज नहीं बल्कि अब सब्जियों से जुड़े हुए पौधे भी दिए जा रहे हैं. इसका किसान लाभ ले सकते हैं और प्रति पौधा दो रुपए तय किया गया है. इसके साथ उन्होंने बताया कि ड्रिप सिंचाई को लेकर भी कई तरह की योजनाएं हैं जिसका लाभ किसान ले सकते हैं. सरकार द्वारा फूलों की खेती केला की खेती स्ट्रॉबेरी और भी अन्य हालदार और सब्जियों की खेती पर अनुदान का प्रावधान है. इसके लिए वह उद्यान विभाग से संपर्क कर सकते हैं.
पांचवां चरण में कृषि विभाग अयोध्या के उपकृषि निदेशक डॉ पीके कन्नौजिया किसानों को बताया कि फार्मर आईडी क्यों बनवाना जरूरी है उन्होंने कहा कि इससे जमीनों की पूरी जानकारी मिल जाती है इसके साथ ही प्रधानमंत्री सम्मान निधि के तहत मिलने वाले सालाना 6 हजार रुपए की राशि भी दी जाएगी. अगर जिस किसान का फॉर्म रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है उन्हें प्रधानमंत्री सम्मान निधि का लाभ नहीं दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि कृषि यंत्र को लेकर टोकन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है जो 4 मार्च तक चलेगा और 6 मार्च को लॉटरी के जरिए कृषि यंत्र पाने वाले किसानों के नाम की घोषणा भी की जाएगी. वहीं किसानों के लिए बीज का भी व्यवस्था सरकार द्वारा किया जा रहा है जिसका लाभ कृषि विभाग से संपर्क करके किसान ले सकते हैं.
छठवें चरण में सलमान जादूगर द्वारा मैजिशियन सलमान ने अपनी कला के माध्यम से खेती से जुड़ी जानकारी प्रस्तुत की. उन्होंने किसानों को गोबर खाद के उपयोग और पशुपालन को बढ़ावा देने का सुझाव दिया. इसके साथ ही उन्होंने वर्मी कंपोस्ट और स्वयं सहायता समूह जैसे विषयों पर भी किसानों के बीच चर्चा-विमर्श किया.
सातवें चरण में केवीके अयोध्या के अध्यक्ष डॉ बी. पी शाही ने बताया किसानों की लागत को कैसे काम किया जाए इसको लेकर कृषि विज्ञान केंद्र अयोध्या लगातार कार्य कर रही है साथ ही किसानों को उन्नत बीजों के बारे में भी बताने का काम किया. उन्होंने गन्ने के विभिन्न प्रजातियों के बारे में किसानों को बताया. वहीं गरमा सीजन में करेला कद्दू की खेती के बारे में बताया. उन्होंने किसानों को सब्जी की खेती करने के लिए जागरूक किया. साथ ही गर्म सीजन में कौन-कौन से सब्जियों की खेती करके किसान अपने आमदनी को बढ़ा सकते हैं इसको लेकर भी जानकारी दी. उन्होंने नरेंद्र रश्मि लौकी की प्रजाति के बारे में भी बताया और कहा कि इसकी खेती किसान कर सकते हैं इसका स्वाद काफी अच्छा है. वहीं उन्होंने गेहूं खेती को लेकर कहा कि तापमान जिस तरह से बढ़ रहा है तो किसान खेत की हल्की सिंचाई जरूर कर दें.
आठवां चरण में गन्ना विभाग के सीडीओ अखंडा प्रताप सिंह ने किसानों को गन्ना के खेती से जुड़ी हुई जानकारी दी. साथ ही उन्होंने बताया कि कौन-कौन से रोग गन्ना में आ रहे हैं जिसके चलते गन्ना की उत्पादन पर असर पड़ रहा है. इसके स्थाई निजात बारे में जानकारी दी. उन्होंने कृषि यंत्र से जुड़ी हुई जानकारी देते हुए कहा कि गाना की खेती से जुड़ी कई तरह के यंत्रों पर सरकार द्वारा अनुदान दिए जा रहे हैं जिसका लाभ किस ले सकते हैं. इसके साथ उन्होंने कहा कि गन्ने की खेती में किसान अधिक कमाई कर सकते है. इसलिए इसकी खेती में बढ़ोतरी करें.
अंतिम, नौवां चरण में लकी ड्रॉ का आयोजन किया गया, जिसमें 10 विजेताओं को 500 रुपये और दूसरे विजेता अंशिका को 2000रुपए दिया गया . इसके साथ ही प्रथम विजेता के तौरपर वंदना को 3000 रुपए की राशि दिया गया. किसान तक’ का यह कारवां किसानों को आधुनिक तकनीक, बाजार से जुड़ाव और आय बढ़ाने के उपायों से जोड़ने का एक प्रभावी मंच प्रदान कर रहा है.
‘किसान तक’ का यह किसान कारवां प्रदेश के 75 जिलों में पहुंचकर किसानों की जमीनी हकीकत, नवाचार और चुनौतियों को सामने ला रहा है. अयोध्या में मिले सकारात्मक अनुभव ने यह साबित किया कि धार्मिक नगरी के साथ-साथ यह जिला कृषि क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है. इसके साथ ही किसानों के खेती में आ रही दिक्कतों और परेशानियों को भी जानने का प्रयास किया गया.
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