कानपुर में किसान कारवां 2.0 आयोजितकिसानों से सीधे संवाद करने, उनकी समस्याओं को समझने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया किसान कारवां 2.0 अब उत्तर प्रदेश के अलग-अलग कृषि-जलवायु क्षेत्रों में किसानों तक पहुंच रहा है. इसी कड़ी में 9 अक्टूबर को कानपुर स्थित चंद्रशेखर आजाद कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कैलाश भवन प्रेक्षागृह में तीसरी क्षेत्रीय किसान महासभा का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम में किसानों, कृषि वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों, अधिकारियों और प्रगतिशील किसानों ने खेती की चुनौतियों, दलहन-तिलहन में आत्मनिर्भरता, नई कृषि तकनीकों और कृषि उत्पादों के वैल्यू एडिशन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की.
किसान कारवां 2.0 के इस आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष और दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री श्याम बिहारी गुप्ता शामिल हुए, जबकि कानपुर के सांसद रमेश अवस्थी अतिथि के रूप में मौजूद रहे. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों ने हिस्सा लिया और विशेषज्ञों के साथ सीधे संवाद कर खेती से जुड़े और अलग-अलग विषयों पर जानकारी प्राप्त की.
कानपुर में आयोजित किसान महासभा को केवल कृषि संबंधी चर्चाओं तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि किसानों के स्वागत और मनोरंजन का भी विशेष ध्यान रखा गया. कार्यक्रम में सीतापुर के जादूगर सलमान ने जादू के अलग-अलग करतब दिखाकर किसानों का मनोरंजन किया. इस आयोजन का उद्देश्य किसानों को खेती की नई तकनीकों, बाजार की संभावनाओं और कृषि क्षेत्र में हो रहे बदलावों की जानकारी देने के साथ-साथ उन्हें अपनी समस्याएं और अनुभव साझा करने के लिए एक मंच उपलब्ध कराना रहा.
किसान महासभा के प्रमुख सत्रों में दलहन और तिलहन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को लेकर विशेष चर्चा हुई. इस पैनल का संचालन किसान तक के संपादक ओमप्रकाश ने किया. पैनल में दलहन अनुसंधान संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. योगेश कुमार, चंद्रशेखर आजाद कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के निदेशक प्रसार डॉ. बीके त्रिपाठी, उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (उपकार) के एडीजी डॉ. परमेंद्र सिंह और प्रगतिशील किसान अरविंद प्रताप सिंह शामिल हुए. पैनल की चर्चा में इस बात पर जोर दिया गया कि दलहन और तिलहन की खेती को बढ़ावा देना किसानों की आय बढ़ाने और देश को इन फसलों के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. इसके लिए उन्नत किस्मों, आधुनिक कृषि तकनीकों, बेहतर उत्पादन पद्धतियों और वैज्ञानिक सलाह को किसानों तक पहुंचाना जरूरी है.
डॉ. योगेश कुमार ने दलहन अनुसंधान के क्षेत्र में विकसित की जा रही उन्नत किस्मों और अनुसंधान कार्यों की जानकारी दी. वहीं, डॉ. बीके त्रिपाठी ने दलहन और तिलहन की खेती में नई तकनीकों की भूमिका पर चर्चा की. विशेषज्ञों और प्रगतिशील किसानों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर उत्पादन और खेती की लाभप्रदता में सुधार की संभावनाएं बढ़ाई जा सकती हैं.
किसान महासभा का एक अन्य महत्वपूर्ण सत्र कृषि उत्पादों के वैल्यू एडिशन और किसानों को उद्यमी बनाने पर केंद्रित रहा. इस पैनल का संचालन किसान तक के वरिष्ठ संवाददाता जेपी सिंह ने किया. इस सत्र में एटारी के निदेशक डॉ. राघवेंद्र सिंह, कृषि विज्ञान केंद्र कन्नौज के अध्यक्ष डॉ. सीके कनौजिया, कानपुर नगर के उप कृषि निदेशक आरएस वर्मा और आलू के प्रगतिशील किसान भंवर पाल सिंह शामिल हुए.
पैनल में चर्चा हुई कि किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए केवल फसल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है. किसानों को अपने कृषि उत्पादों का प्रसंस्करण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बेहतर बाजारों तक पहुंच बनाने पर भी ध्यान देना होगा. वैल्यू एडिशन के माध्यम से कृषि उत्पादों से कई तरह के उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं, जिससे उनकी बाजार में उपयोगिता और संभावित कीमत बढ़ सकती है.
विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि किसान खेती के साथ-साथ उद्यमिता की दिशा में भी आगे बढ़ें. यदि किसान अपने उत्पादों को बेहतर तरीके से बाजार तक पहुंचाने और उनकी प्रोसेसिंग करने की क्षमता विकसित करते हैं, तो उन्हें अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त करने के अवसर मिल सकते हैं. इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और कृषि आधारित व्यवसायों को भी बढ़ावा मिल सकता है.
किसान कारवां 2.0 के दौरान कृषि परिषद के गठन की पहल की भी जानकारी दी गई. इस परिषद में कृषि अधिकारियों, वैज्ञानिकों और प्रगतिशील किसानों को शामिल करने का उद्देश्य किसानों और सरकार के बीच संवाद को मजबूत बनाना है. परिषद के माध्यम से किसानों की जमीनी समस्याओं, खेती में आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों और कृषि योजनाओं से जुड़े उनके अनुभवों को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी. इससे किसानों की वास्तविक जरूरतों को समझने और कृषि क्षेत्र से जुड़ी नीतियों और योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए फीडबैक उपलब्ध हो सकेगा. इस पहल का मुख्य उद्देश्य किसानों की आवाज को संबंधित मंचों तक पहुंचाना और कृषि क्षेत्र में जमीनी स्तर पर आने वाली समस्याओं के समाधान के लिए संवाद की प्रक्रिया को मजबूत करना है.
किसान कारवां 2.0 के तहत खेती और कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने वाले किसानों को पहचान देने के लिए 'कृषि वीर' सम्मान की पहल भी की गई है. इसके अंतर्गत संबंधित कृषि-जलवायु क्षेत्र के प्रत्येक जिले से एक किसान का चयन किया जा रहा है. कानपुर की किसान महासभा में सेंट्रल प्लेन जोन के 12 जिलों से चुने गए 12 किसानों को कृषि वीर के रूप में सम्मानित किया गया. इन किसानों ने नींबू उत्पादन, आम उत्पादन, वैल्यू एडिशन, मिलेट, जैविक और प्राकृतिक खेती, आलू उत्पादन, फूलों की खेती और शहद उत्पादन जैसे क्षेत्रों में काम किया है.
चंद्रशेखर आजाद कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. संजीव गुप्ता और गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने चयनित किसानों को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया.
1. आनंद मिश्रा — लेमन मैन और प्रगतिशील किसान
2. उपेन्द्र सिंह — अवध आम उत्पादक संगठन (FPO)
3. संगीता रावत — कृषि सखी और वैल्यू एडिशन
4. राकेश शुक्ला — प्रगतिशील किसान, फतेहपुर
5. मंत्रवती देवी — मिलेट की खेती करने वाली प्रगतिशील किसान, इटावा
6. सुभाष सिंह — प्रगतिशील किसान, कौशांबी
7. कुंवर सिंह राजपूत — प्रगतिशील किसान, औरैया
8. हिमांशु गंगवार — जैविक खेती, फर्रुखाबाद
9. भंवर पाल सिंह — आलू उत्पादन के प्रगतिशील किसान, कानपुर नगर
10. फूल सिंह यादव — प्राकृतिक खेती, कानपुर देहात
11. विजय कुमार — फूलों की खेती करने वाले प्रगतिशील किसान
12. ओम प्रकाश मौर्य — शहद उत्पादन से जुड़े एफपीओ, हरदोई
इन किसानों का सम्मान कृषि क्षेत्र में नवाचार, उद्यमिता और बेहतर खेती के तरीकों को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है. ऐसे किसानों के अनुभव दूसरे किसानों को भी नई तकनीकों और वैकल्पिक कृषि व्यवसायों को अपनाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं.
किसान कारवां 2.0 का अगला पड़ाव झांसी होगा. 17 अक्टूबर को बुंदेलखंड क्षेत्र के किसानों के लिए अगली क्षेत्रीय किसान महासभा आयोजित की जाएगी. इसमें क्षेत्र के किसान, कृषि वैज्ञानिक, विशेषज्ञ, अधिकारी और प्रगतिशील किसान शामिल होंगे. बुंदेलखंड में होने वाली इस महासभा में स्थानीय कृषि चुनौतियों, फसल विविधीकरण, नई तकनीकों और किसानों की आय बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की जाएगी. अलग-अलग कृषि-जलवायु क्षेत्रों में आयोजित होने वाली किसान महासभाओं का उद्देश्य संबंधित क्षेत्रों की जरूरतों के अनुसार खेती से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श करना और किसानों को विशेषज्ञों से जोड़ना है.
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