एथेनॉल ब्लेंडिंग नीति पर घमासानराजस्थान की राजधानी जयपुर में डेयरी किसानों ने केंद्र सरकार की एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) नीति के खिलाफ नया आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया है. इस आंदोलन को 'M-20 आंदोलन' नाम दिया गया है. किसानों का कहना है कि जिस तरह दूध में पानी मिलाना मिलावट माना जाता है, उसी तरह पेट्रोल में एथेनॉल मिलाना भी एक तरह की मिलावट है. किसानों ने इस आंदोलन के जरिए सरकार की एथेनॉल ब्लेंडिंग नीति पर सवाल उठाए हैं और इसे वापस लेने की मांग की है.
जयपुर दुग्ध उत्पादक संघर्ष समिति के अध्यक्ष रमण यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि 'M-20' आंदोलन एक प्रतीकात्मक अभियान है. उन्होंने कहा कि "M" का मतलब दूध (Milk) है और "20" का मतलब उसमें 20 प्रतिशत पानी मिलाना है. इसी तरह सरकार पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने की नीति अपना रही है. किसानों का कहना है कि अगर दूध में मिलावट गलत है, तो पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने को भी सामान्य नहीं माना जाना चाहिए.
रमण यादव ने कहा कि यह आंदोलन सिर्फ डेयरी किसानों का नहीं है, बल्कि युवाओं और आम लोगों की भी आवाज है, जो इस नीति के प्रभाव को लेकर चिंतित हैं.
आंदोलन के तहत किसानों ने एक अलग तरह का विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है. उन्होंने कहा कि जो बीजेपी मंत्री एथेनॉल ब्लेंडिंग नीति का समर्थन कर रहे हैं, उन्हें प्रतीकात्मक रूप से 'M-20 दूध' भेजा जाएगा. इस दूध में पानी मिलाकर यह संदेश दिया जाएगा कि जैसे दूध में मिलावट स्वीकार नहीं की जा सकती, वैसे ही पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की नीति पर भी सवाल उठाए जाने चाहिए.
किसानों का कहना है कि यह विरोध पूरी तरह शांतिपूर्ण और प्रतीकात्मक होगा, जिसका उद्देश्य लोगों का ध्यान इस मुद्दे की ओर आकर्षित करना है.
रमण यादव ने आरोप लगाया कि सरकार एथेनॉल ब्लेंडिंग के नाम पर मिलावट को सामान्य बनाने की कोशिश कर रही है. उनका कहना है कि इस नीति का असर केवल वाहनों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव ग्रामीण परिवहन व्यवस्था, खेती और डेयरी व्यवसाय पर भी पड़ रहा है.
उन्होंने कहा कि गांवों में बड़ी संख्या में लोग खेती और डेयरी पर निर्भर हैं. ऐसे में अगर ईंधन से जुड़ी नीतियों का असर इन क्षेत्रों पर पड़ता है, तो इसका सीधा प्रभाव किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी देखने को मिलेगा.
रमण यादव ने बताया कि यह अभियान पहले हुए एक विरोध प्रदर्शन से प्रेरित है. उस समय जयपुर के डेयरी किसानों ने दूध और पानी के मिश्रण को M-0, M-20, M-50 और M-100 नाम देकर प्रदर्शित किया था. इसके जरिए उन्होंने लोगों को यह समझाने की कोशिश की थी कि किसी भी चीज में मिलावट को सही नहीं ठहराया जा सकता.
अब उसी विचार को आगे बढ़ाते हुए किसानों ने 'M-20 आंदोलन' शुरू किया है, ताकि एथेनॉल ब्लेंडिंग नीति के खिलाफ अपनी आवाज सरकार तक पहुंचा सकें.
आंदोलन कर रहे किसानों की मुख्य मांग है कि केंद्र सरकार पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की नीति को वापस ले. इसके साथ ही उन्होंने मांग की है कि इस नीति को लागू करने के पीछे किन लोगों को लाभ मिल रहा है और यह फैसला किन आधारों पर लिया गया, इसकी निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराई जाए.
किसानों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाता, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा.
'M-20 आंदोलन' की शुरुआत के साथ ही यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है. किसानों का कहना है कि यदि सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देती है, तो आंदोलन को और बड़े स्तर पर चलाया जाएगा. वहीं, अब यह देखना होगा कि केंद्र सरकार इस विरोध पर क्या प्रतिक्रिया देती है और एथेनॉल ब्लेंडिंग नीति को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं.
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