पाकिस्तान से चीनी नहीं खरीदेगा भारतदेश में चीनी के बढ़ते दामों और बाजार में इसकी सप्लाई बढ़ाने की कोशिशों के बीच भारत सरकार ने पाकिस्तान से चीनी आयात को लेकर अपना रुख साफ कर दिया है. पाकिस्तान ने घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए कच्ची चीनी के बिना आयात शुल्क के इंपोर्ट की अनुमति दी है. इसके बाद वहां के चीनी उत्पादक भारत को चीनी बेचने में रुचि दिखा रहे हैं. हालांकि, भारत ने साफ कर दिया है कि वह पाकिस्तान से चीनी खरीदने की अनुमति नहीं देगा. शुक्रवार को मीडिया से बातचीत के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से पाकिस्तान की ओर से भारत को चीनी बेचने की खबरों पर सवाल पूछा गया. इस पर उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को लेकर भारत की नीति पहले से ही साफ है.
भारत का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब देश में चीनी के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं. घरेलू बाजार में चीनी की कमी दूर करने और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के बिना आयात शुल्क की अनुमति दी है. इसके बाद पाकिस्तान के चीनी उद्योग ने अपनी सरकार से भारत को चीनी निर्यात की संभावनाएं तलाशने का आग्रह किया था. हालांकि, भारत सरकार पाकिस्तान पर लागू मौजूदा व्यापार प्रतिबंधों में किसी तरह की छूट देने के मूड में नहीं है. एक सरकारी सूत्र के मुताबिक, अगर भारत को अतिरिक्त चीनी की जरूरत है तो वैश्विक बाजार में कई दूसरे विकल्प मौजूद हैं. ऐसे में भारत को पाकिस्तान से चीनी आयात करने की जरूरत नहीं है.
रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान भी चीनी के निर्यात को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. बुधवार को पाकिस्तान ने करीब 1.05 लाख टन चीनी बेचने के लिए ग्लोबल टेंडर जारी की. ऐसे में वहां के चीनी उत्पादकों के लिए भारत जैसा बड़ा बाजार महत्वपूर्ण साबित हो सकता था. हालांकि, भारत और पाकिस्तान के बीच मौजूदा व्यापार प्रतिबंधों के कारण पाकिस्तानी चीनी के लिए भारतीय बाजार का रास्ता फिलहाल बंद है.
भारत ने मई 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान से सभी तरह के सामान के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष आयात पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था. सरकार के मौजूदा रुख से साफ है कि चीनी के मामले में भी इस प्रतिबंध में कोई छूट देने की तैयारी नहीं है.
भारत दुनिया के प्रमुख चीनी उत्पादक और उपभोक्ता देशों में शामिल है. हालांकि, गन्ने के उत्पादन में बदलाव, चीनी को इथेनॉल उत्पादन की ओर मोड़ने और चीनी मिलों के उत्पादन में उतार-चढ़ाव के कारण घरेलू बाजार में कभी-कभी कमी हो जाती है. इसी वजह से घरेलू कीमतों में तेजी के बीच सरकार ने 10 लाख टन बिना आयात शुल्क की अनुमति दी है. इससे भारतीय रिफाइनरों और व्यापारियों को दूसरे देशों से चीनी खरीदने के विकल्प मिलेंगे. सरकार का लक्ष्य घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाकर बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण करना है. फिलहाल भारत ने साफ कर दिया है कि यह जरूरत पाकिस्तान से चीनी खरीदकर पूरी नहीं की जाएगी.
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