किस सब्जी की वैरायटी है गोल्डन एकरकिसी भी मौसम में लोगों को बाजार में सब्जी की ढेरों वैरायटी मिलती हैं. वहीं, सब्जी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होती है. ऐसे में पूरे साल मार्केट में सब्जियों की डिमांड रहती है. खास बात यह है कि सभी सब्जियों की कई अलग-अलग किस्में भी हैं. इन किस्मों की पैदावार क्षमता भी अलग-अलग होती है. ऐसी ही एक हरी सब्जी है जिसकी वैरायटी का नाम गोल्डन एकर है. दरअसल, ये पत्ता गोभी की एक खास वैरायटी है. इसकी खेती के लिए अक्टूबर-नवंबर का महीना उचित माना जाता है. आइए जानते हैं इसकी उन्नत किस्में कौन-कौन सी हैं और कैसे करें इसकी खेती.
गोल्डन एकर: पत्ता गोभी की ये एक लोकप्रिय और पुरानी किस्म है. यह किस्म रोपाई के 60 से 65 दिनों में तैयार हो जाती है. इसके प्रत्येक फल का वजन 1 से 1.5 किलो होता है. पत्ता गोभी की यह किस्म 40 से 50 टन प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन देती है. यह किस्म कई रोगों के लिए प्रतिरोधी होती है.
पूसा क्रांति: पत्ता गोभी की ये एक लोकप्रिय और उच्च उपज देने वाली किस्म है. यह अपनी मजबूत पत्तियों और बड़ी गांठ के लिए जानी जाती है. किसानों के बीच इसकी काफी मांग है. यह किस्म प्रति हेक्टेयर उच्च उपज देती है. यह किस्म 60 से 65 दिन में तैयार हो जाती है.
पूसा मुक्ता: इस किस्म की पत्ता गोभी गोल और मध्यम आकार की होती है. वहीं, इस किस्म के प्रत्येक फल का वजन डेढ़ से दो किलो तक होता है. यह किस्म काली सड़न रोग के प्रति सहनशील होती है. साथ ही ये किस्म प्रति एकड़ भूमि में खेती करने पर 10 से 12 टन तक पैदावार देती है.
अर्ली ड्रम हेड: पत्ता गोभी की ये जल्दी पकने वाली किस्मों में से एक है. इस किस्म की पत्ता गोभी चपटे और मध्यम से लेकर बड़े आकार की होती है. इसके प्रत्येक फल का वजन दो से तीन किलो का होता है. ये किस्म प्रति एकड़ 8 से 12 टन तक पैदावार देती है.
क्विस्टो किस्म: यह पत्ता गोभी की संकर किस्मों में से एक है. इस किस्म की गांठ आकार में गोल और सख्त होती है. इसके प्रत्येक फल का वजन दो से तीन किलो का होता है. ये किस्म रोपाई के 80 से 85 दिनों बाद तैयार हो जाती है. ये किस्म प्रति एकड़ 14 से 16 टन तक उपज देती है.
पत्ता गोभी की खेती वैसे तो हर प्रकार की मिट्टी में की जा सकता है, लेकिन अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी सबसे अच्छी होती है. वहीं, इसकी खेती के लिए खेत की कम से कम 3-4 बार जुताई करनी चाहिए. आखिरी जुताई के समय, अच्छी तरह से गाय के गोबर को मिट्टी में मिलाना चाहिए. फिर पत्ता गोभी को समतल क्यारियों में लगाना चाहिए. ध्यान रहे कि पंक्तियों से पंक्तियों की दूरी 45-60 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 30-45 सेंटीमीटर होनी चाहिए. वहीं, रोपाई के तुरंत बाद पहली सिंचाई करनी चाहिए और सर्द मौसम में 10 से 15 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें.
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