New Seed Bill: विदेशी कंपनियों को छूट, देसी बीज पर संकट, भारतीय किसानों की बढ़ेगी मुश्किल

New Seed Bill: विदेशी कंपनियों को छूट, देसी बीज पर संकट, भारतीय किसानों की बढ़ेगी मुश्किल

नया बीज बिल बीज कंपनियों को भारत में बड़ी छूट देता है. बिना गुणवत्ता जांच विदेशी बीजों की एंट्री से देसी बीज, छोटे किसान और पारंपरिक खेती खतरे में पड़ सकती है. इससे खेती की लागत बढ़ने, कॉरपोरेट कंट्रोल देश की खाद्य सुरक्षा पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है.

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New Seed Bill: विदेशी कंपनियों को छूट, देसी बीज पर संकट, भारतीय किसानों  की बढ़ेगी मुश्किलबीज विधेयक 2025

देश के किसान देश के लिए कितना भी कुछ कर लें, सरकार का ध्यान विदेशी कंपनियों को फायदा पहुंचाने पर ही रहता है. जहां भारतीय किसान अपने बीज अब तक बचाकर रखते आए हैं वहीं अब एक ऐसा नया बीज बिल लाया जा रहा है, जिसमें विदेश से आने वाले बीजों को खास छूट दी जा रही है. इस कानून के तहत विदेशी कंपनियां बिना ज्यादा जांच के अपने बीज भारत में बेच सकेंगी. देखने में यह कानून आधुनिक खेती के लिए बताया जा रहा है, लेकिन इसके पीछे विदेशी बीज कंपनियों को फायदा पहुंचाने की आशंका है. इससे हमारे देश के किसान, देसी बीज और पारंपरिक खेती खतरे में पड़ सकती है. यह विधेयक भारत की खेती को आत्मनिर्भर से विदेशी निर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.

किसानों को क्या चाहिए?

किसानों को तीन चीजें सबसे ज्यादा चाहिए-

  • समय पर बीज
  • सस्ती कीमत पर बीज
  • अच्छी फसल देने वाले बीज

लेकिन इस नए बीज विधेयक में इन बातों का साफ तौर पर जिक्र नहीं है. इससे किसानों को डर है कि उन्हें अच्छे और सस्ते बीज मिलना मुश्किल हो सकता है.

विदेश से आने वाले बीजों को छूट

इस कानून में कहा गया है कि विदेश से आने वाले बीजों को खास छूट मिलेगी. इन बीजों की भारत में गुणवत्ता जांच जरूरी नहीं होगी. कंपनियां खुद ही कह देंगी कि उनका बीज अच्छा है, और सरकार उस पर भरोसा कर लेगी. इसे सेल्फ सर्टिफिकेट खुद को देना कहा जाता है.

इसका मतलब है कि विदेशी कंपनियां आसानी से अपने बीज भारत में बेच सकेंगी, लेकिन देश के छोटे किसान और बीज बेचने वाले मुश्किल में पड़ जाएंगे.

पहले भी हुआ है नुकसान

1960 के समय में भारत में खाने का संकट था. तब गेहूं और धान के बीज विदेश से मंगाए गए. इन बीजों से पैदावार तो बढ़ी, लेकिन उन्हें ज्यादा खाद, दवा और पानी चाहिए था.

  • किसानों का खर्च बढ़ा
  • किसान कर्ज में डूब गए
  • जमीन का पानी नीचे चला गया

बाद में बीटी कपास आया. शुरू में अच्छा लगा, लेकिन फिर कीड़े लगने लगे. किसानों को और ज्यादा दवाइयां खरीदनी पड़ीं. इससे कई किसान कर्ज में फंस गए और दुख की बात है कि कई किसानों ने आत्महत्या तक कर ली.

अब जीएम बीज का खतरा

अब विदेशी कंपनियां भारत में जीएम (जेनेटिकली मॉडिफाइड) बीज लाना चाहती हैं. ये बीज बहुत महंगे होते हैं और हर साल नए बीज खरीदने पड़ते हैं. इससे किसानों का खर्च और बढ़ेगा. साथ ही, इससे पर्यावरण, पौधों और कीड़ों पर भी बुरा असर पड़ेगा.

हमारी देसी किस्में खतरे में

अगर विदेशी बीजों को ज्यादा बढ़ावा मिला, तो भारत की पारंपरिक किस्में खत्म हो सकती हैं.
जैसे-

  • इलाहाबादी अमरूद
  • मलिहाबादी आम
  • बनारसी लंगड़ा

ये सब हमारी पहचान हैं, लेकिन विदेशी बीजों के आने से ये धीरे-धीरे गायब हो सकती हैं.

कॉरपोरेट कंपनियों का बढ़ता कंट्रोल

अगर बीज बाजार पर बड़ी कंपनियों का कब्जा हो गया, तो वे वही बीज बेचेंगी जिनसे उन्हें फायदा होगा. इससे आत्मनिर्भर खेती और देश की खाद्य सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी. पहले भी ठेका खेती और मंडी कानून लाए गए थे, लेकिन किसानों के आंदोलन से उन्हें वापस लेना पड़ा.

नया बीज विधेयक विदेशी कंपनियों को फायदा पहुंचा सकता है, लेकिन किसानों के लिए खतरा बन सकता है. अगर समय रहते आवाज नहीं उठाई गई, तो किसानों की परेशानी बढ़ेगी और खेती पर बुरा असर पड़ेगा. हमें अपनी देसी खेती, देसी बीज और किसानों को बचाना बहुत जरूरी है.

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