नकली बीजमहाराष्ट्र सरकार ने राज्य में नकली और मिलावटी बीजों की बिक्री को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है. दरअसल, सरकार ने नकली और मिलावटी बीजों पर रोक लगाने के लिए एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार करने की घोषणा की है और इसे बनाने के लिए एक हाई-लेवल कमेटी बनाई है. SoP में बीज कंपनियों और डिस्ट्रीब्यूटर्स की जवाबदेही तय करने के उपाय बताए जाएंगे और नकली बीज बनाने और बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई का एक प्लान बताया जाएगा.
हाल ही में कई चुने हुए प्रतिनिधियों ने राज्य विधानमंडल में नकली बीजों का मुद्दा उठाया था और आरोप लगाया था कि नकली बीज बनाने वालों ने पूरे महाराष्ट्र में अपना काम फैला लिया है, जिससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है. इसके जवाब में, राज्य के कृषि मंत्री और अन्य चुने हुए प्रतिनिधियों वाली एक हाई-लेवल कमेटी बनाई गई है. ऐसे में उम्मीद है कि एक महीने के अंदर SoP को फाइनल कर दिया जाएगा. एक बार नोटिफाई होने के बाद बीज कंपनियों को SoP का पालन करना होगा.
इस बीच राज्यपाल और राज्य विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति, आचार्य देवव्रत ने राज्य के कृषि विश्वविद्यालयों से पारंपरिक देसी बीजों को बेहतर बनाने और उनमें सुधार करने का आग्रह किया है. उन्होंने कहा कि बीज इस तरह से विकसित किए जाने चाहिए कि किसान खराब हालात में भी कमाई कर सकें. इसके अलावा कृषि विश्वविद्यालयों से राज्य में प्राकृतिक खेती में क्रांति लाने में योगदान देने का आग्रह किया.
राज्यपाल मुंबई के राजभवन से राज्य के कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और कृषि और पशु विज्ञान विश्वविद्यालयों के वाइस-चांसलरों के साथ ऑडियो-विजुअल कॉन्फ्रेंस के जरिए बातचीत कर रहे थे. उन्होंने कहा कि हाइब्रिड बीज किसानों के लिए एक समस्या बन गए हैं और महंगे भी हैं. इनके इस्तेमाल के लिए ज़्यादा मात्रा में रासायनिक उर्वरकों की जरूरत होती है. ऐसे बीजों से पैदा होने वाले अनाज में स्वाद कम होता है और पोषण मूल्य भी कम होता है. इसलिए, उन्होंने ज़ोर दिया कि कृषि विश्वविद्यालयों को पारंपरिक बीजों पर रिसर्च करनी चाहिए और उन्हें अपग्रेड करना चाहिए.
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