भारत ने किया खाद का भरपूर भंडारण (सांकेतिक तस्वीर)ईरान के इजराइल और अमेरिका से चल रहे युद्ध के कारण वैश्विक व्यापार और समुद्री परिवहन पर दबाव बढ़ गया है. पश्चिम एशिया (मिडिल-ईस्ट) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव की इस स्थिति का असर उर्वरकों और उनके कच्चे माल की अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन पर भी पड़ रहा है. इस बीच, भारत सरकार ने किसानों को भरोसा दिलाया है कि खरीफ सीजन के लिहाज से देश में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता है. यानी किसानों को खाद की किल्लत का सामना नहीं करना पड़ेगा.
उर्वरक विभाग ने एक बयान जारी कर कहा है कि संभावित आपूर्ति संकट को देखते हुए सरकार ने पहले से ही अग्रिम भंडारण की रणनीति अपनाई है. इसी के तहत देश में उर्वरकों का बड़ा बफर स्टॉक तैयार किया गया है, ताकि अंतरराष्ट्रीय हालात का घरेलू कृषि व्यवस्था पर असर न पड़े. 6 मार्च तक देश में कुल उर्वरक भंडार बढ़कर करीब 177 लाख मीट्रिक टन हो गया है.
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, यह भंडार पिछले साल की तुलना में काफी ज्यादा है. पिछले वर्ष इसी अवधि में देश में लगभग 129.85 लाख मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध था, जबकि इस बार इसमें करीब 36.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है. इस बढ़ोतरी में विशेष रूप से फॉस्फेट और पोटाश आधारित उर्वरकों की बड़ी भूमिका रही है.
आंकड़ों के मुताबिक, डीएपी का स्टॉक लगभग 25 लाख मीट्रिक टन और एनपीके उर्वरकों का भंडार करीब 55 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया है. वहीं, सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाले उर्वरक यूरिया की उपलब्धता भी करीब 59 लाख मीट्रिक टन तक दर्ज की गई है. विभाग ने कहा कि यह मजबूत स्टॉक आगामी खरीफ बुवाई के दौरान किसानों को किसी तरह की कमी से बचाने में मदद करेगा.
सरकार ने उर्वरक आयात को लेकर भी अग्रिम कदम उठाए हैं. फरवरी 2026 तक भारत करीब 98 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का आयात कर चुका है, जबकि अगले तीन महीनों के लिए 17 लाख मीट्रिक टन से अधिक का अतिरिक्त आयात पहले से तय किया जा चुका है. इससे वैश्विक आपूर्ति बाधाओं के बावजूद देश में खाद की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है.
इसके साथ ही भारतीय कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय उत्पादकों के साथ फॉस्फेट और पोटाश आधारित उर्वरकों की दीर्घकालिक आपूर्ति के समझौते भी किए हैं. इन समझौतों का उद्देश्य वैश्विक कीमतों और सप्लाई में उतार-चढ़ाव के जोखिम को कम करना है.
उर्वरक क्षेत्र के लिए गैस आपूर्ति को लेकर भी सरकार ने प्राथमिकता तय की है. हाल ही में हुई उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि उर्वरक संयंत्रों को गैस आपूर्ति सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा, ताकि घरेलू उत्पादन प्रभावित न हो.
विभाग के अनुसार, मौजूदा समय उर्वरक उद्योग के लिए अपेक्षाकृत कम खपत का दौर होता है, जब कई कंपनियां अपने संयंत्रों के रखरखाव और मरम्मत का काम करती हैं. इस बार कंपनियों ने वैश्विक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अपने रखरखाव कार्यक्रम को पहले ही पूरा करने का फैसला लिया है, ताकि खरीफ सीजन के दौरान उत्पादन और आपूर्ति सुचारु बनी रहे.
सरकार ने कहा है कि वैश्विक ऊर्जा और व्यापार बाजार में तेजी से बदलते हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है. उर्वरक विभाग पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के साथ समन्वय कर स्थिति की रियल टाइम निगरानी कर रहा है, ताकि आयातित उर्वरकों की खेपों की समय पर निकासी और वितरण सुनिश्चित किया जा सके.
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