फरवरी में अरहर की फसल पर इन कीटों का हमला! बचाव के लिए अपनाएं आसान ट्रिक

फरवरी में अरहर की फसल पर इन कीटों का हमला! बचाव के लिए अपनाएं आसान ट्रिक

फरवरी में बढ़ते तापमान के बीच अरहर की फसल पर कुछ खतरनाक कीटों का खतरा बढ़ जाता है. अगर समय रहते इन कीटों से बचाव नहीं किया जाए, तो फलियां कमजोर हो जाती हैं और दानों की क्वालिटी खराब हो जाती है. आइए जानते हैं बचाव के उपाय.

Advertisement
फरवरी में अरहर की फसल पर इन कीटों का हमला! बचाव के लिए अपनाएं आसान ट्रिकअरहर की फसल पर कीटों का हमला

फरवरी के महीने में जैसे-जैसे तापमान में बदलाव होता है, वैसे-वैसे अरहर की खेती करने वाले किसानों की चिंता भी बढ़ जाती है. इस समय फसल पर फल मक्खी, फली बेधक और पत्ती लपेटक कीट का हमला सबसे ज्यादा देखा जाता है, जो सीधे पैदावार को नुकसान पहुंचाते हैं. ये कीट फलियों को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे दाने कमजोर हो जाते हैं और उनकी क्वालिटी भी खराब हो जाती है. ऐसे में कृषि वैज्ञानिकों का मानना होता है कि अगर समय रहते इन कीटों पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो फसल को भारी नुकसान हो सकता है. ऐसे में आइए जानते हैं क्या हैं इन कीटों के लक्षण और कैसे करें फसल का बचाव.  

फल मक्खी कीट के लक्षण

जब अरहर की फसल में फल मक्खी का प्रकोप होता है, तो इसके लक्षण साफ दिखाई देने लगते हैं. सबसे पहले फलियों की सतह पर बहुत छोटे-छोटे, सुई के नोक जैसे छिद्र नजर आते हैं, जहां संक्रमण होता है, वहां फलियों पर भूरे या काले रंग के धब्बे भी बनने लगते हैं. इसके बाद मक्खी का लार्वा फली के अंदर घुसकर दानों को खुरच-खुरच कर खाने लगता है, जिससे दाने सिकुड़ जाते हैं और उनकी गुणवत्ता खत्म हो जाती है. धीरे-धीरे संक्रमित फलियां अंदर से सड़ने लगती हैं और कई बार समय से पहले सूख कर नीचे गिर जाती हैं, जिससे नुकसान और बढ़ जाता है.

फल मक्खी कीट से बचाव

अरहर की फसल में फल मक्खी बहुत खतरनाक कीट है. इस कीट से बचाव के लिए फसल में कीट दिखते ही डायमेथोएट 30% EC का छिड़काव 2 मिली प्रति लीटर पानी (या 1237 मिली प्रति हेक्टेयर) की दर से किया जा सकता है. इसके अलावा इमिडाक्लोप्रिड का 1 मिली दवा 4 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना भी प्रभावी होता है. फूल आने की अवस्था में क्वीनालफॉस 3 मिली प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करने पर अच्छे परिणाम मिलते हैं. वहीं, जैविक तरीके से बचाव के लिए नीम के तेल का 2 प्रतिशत घोल बनाकर छिड़काव करें.

फली बेधक कीट के लक्षण

अरहर की फसल में फली बेधक कीट बहुत नुकसान पहुंचाता है. इसके लक्षण आसानी से पहचाने जा सकते हैं. सबसे पहले फलियों पर गोल-गोल छेद दिखाई देने लगते हैं. इसके बाद कीट का लार्वा फली के अंदर घुसकर दानों को खा जाता है, जिससे दाने पूरी तरह खराब हो जाते हैं. कई बार ऐसा भी देखा जाता है कि लार्वा का सिर फली के अंदर होता है और उसका पिछला हिस्सा बाहर लटका रहता है, जो इसकी पहचान का बड़ा संकेत है. यह कीट सिर्फ फलियों को ही नहीं, बल्कि फूलों और कलियों को भी खाता है, जिससे फूल आने की प्रक्रिया रुक जाती है और फलियां बन ही नहीं पातीं. अगर समय पर इस कीट पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो अरहर की फसल की पैदावार 60 से 90 प्रतिशत तक कम हो सकती है, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.

फली बेधक कीट से बचाव

अरहर की फसल को फली बेधक कीट से बचाने के लिए जब फसल में लगभग 50 प्रतिशत फूल आ जाएं, तब क्लोरएन्ट्रानिलिप्रोल 18.5 SC दवा का छिड़काव 150 मिली प्रति हेक्टेयर की दर से करना चाहिए. इसके अलावा इमामेक्टिन बेंजोएट 5% SG दवा का 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करना भी बहुत असरदार होता है. साथ ही बचाव के लिए खेत में प्रति एकड़ 12 से 15 फेरोमोन ट्रैप जरूर लगाएं, जिससे कीटों की संख्या पर नियंत्रण रहता है और उनकी निगरानी भी आसानी से होती है. इसके अलावा इंटरक्रॉपिंग के रूप में ज्वार या सूरजमुखी की बुवाई करें, इससे कीटों का प्रकोप कम होता है.

पत्ती लपेटक कीट के लक्षण

अरहर की फसल में पत्ती लपेटक कीट के लक्षण आसानी से पहचाने जा सकते हैं. यह कीट पत्तियों को जाले से लपेट देता है, जिससे पत्तियां आपस में चिपक जाती हैं. इसके बाद कीट इन चिपकी हुई पत्तियों को खाकर उन्हें जालीदार बना देता है. अक्सर ऊपरी पत्तियों पर हल्के पीले रंग की छोटी सुंडी दिखाई देती है, जो इसकी पहचान का संकेत होती है. इस कीट के लगने से पौधे की बढ़वार रुक जाती है, पत्तियां सूखने लगती हैं और फसल कमजोर हो जाती है. अगर समय पर इस कीट पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो यह पूरी फसल को भारी नुकसान पहुंचा सकता है.

इस कीट से ऐसे करें बचाव

अरहर की फसल में पत्ती लपेटक कीट से बचाव के लिए अगर खेत में इस कीट के लक्षण दिखाई देने लगे, तो इमामेक्टिन बेंजोएट 5% SG दवा का 10 ग्राम प्रति 15 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें. इसके अलावा क्लोरोपायरीफॉस दवा का 25 मिली प्रति 15 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना भी प्रभावी होता है. साथ ही, जिन पत्तियों पर कीट का असर दिखे, उन्हें तोड़कर खेत से बाहर निकालकर नष्ट कर दें, ताकि कीट आगे न फैले. शुरुआत में जैविक उपाय के रूप में नीम के तेल (1500–3000 PPM) का छिड़काव करना भी बहुत लाभकारी होता है, जिससे कीटों पर प्राकृतिक रूप से नियंत्रण पाया जा सकता है. इन आसान उपायों को अपनाकर अरहर की फसल को इन कीट से सुरक्षित रखा जा सकता है. 

POST A COMMENT