जानिए ट्रेंच विधि के बारे में किसान परंपरागत तरीके से गन्ने की बुवाई करते हैं, लेकिन अगर किसान ट्रेंच विधि से गन्ने की बुवाई करके करते हैं तो उन्हें दूसरे तरीकों के मुकाबले ज्यादा पैदावार पा सकते हैं, इस विधि से बुवाई करने पर फसल की ज्यादा सिंचाई भी नहीं करनी पड़ती है. गन्ने की मिठास और अधिक उत्पादन के लिए करे ट्रेंच विधि बेहतरीन माना जाता है.भारत को दुनिया का सबसे बड़े गन्ना उत्पादक देश माना जाता है.उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र सबसे ज्यादा किसान गन्ना उगाते हैं. यहां के किसान नई तकनीकों पर काम करके गन्ने का अधिक उत्पादन प्राप्त करने में सफलता को हासिल कर रहे हैं. ट्रेंच विधि एक ऐसी तकनीक है जिससे किसानों और स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को अच्छी आमदनी का अवसर मिल रहा है.
ट्रेंच विधि से गन्ना उत्पादन में क्रांतिकारी प्रगति ट्रेंच विधि गन्ना की खेती करने का एक नया और उत्पादक तरीका है. इस तकनीक में, दो आंख वाले गन्ने के टुकड़े क्यारी विधि से उगाए जाते हैं, जिससे प्रति मीटर क्षेत्र में एक बार में 10 गन्ने लगाए जा सकते हैं. इसके साथ ही ट्रेंच विधि में खेती के दौरान गन्ने के बीमारियों और कीटाणुओं का प्रबंधन भी सुरक्षित तरीके से किया जाता है.
ये भी पढ़ें: Onion Price: किसान ने 443 किलो प्याज बेचा, 565 रुपये घर से लगाने पड़े, निर्यात बंदी ने किया बेहाल
ट्रेंच विधि का उपयोग करने से गन्ना उत्पादकता में वृद्धि होती है और किसानों को कई तरह के लाभ मिलते हैं. इस विधि के फायदे निम्नलिखित हैं
ट्रेंच विधि खेती में लागत कम आती है, जिससे किसानों को उचित दाम में उत्पादन करने में मदद मिलती है.
इस तकनीक से गन्ने की उत्पादकता में वृद्धि होती है, जिससे किसान ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं.
ट्रेंच विधि से गन्ने में रस की मिठास ज्यादा होती है और गन्ना भी ज्यादा मोटा होता है, जिससे उत्पादकता और गुणवत्ता दोनों में सुधार होता है.
ट्रेंच विधि से बुवाई के लिए सबसे पहले किसान को बुवाई के लिए खेत तैयार करना होता है, खेत तैयार करने के लिए जैसे आप प्रचलित विधियों से गन्ना बुवाई के लिए खेत को तैयार करते हैं. खेत तैयार करने के लिए एक बात का विशेष ध्यान दें कि खेत तैयार करने के लिए ऐसे खेत का चुनाव करें, जहां पर पहले लगी गन्ना की फसल में कोई बीमारी न लगी रही हो, उस खेत में जल भराव की समस्या न हो, एक सामान्य खेत हो.
इसमे उर्वरकों की बर्बादी नहीं होती, गन्ना अपेक्षाकृत कम गिरता है. मिल योग्य गन्ने समान मोटे और लंबे होते हैं, जिसके कारण परंपरागत विधि की तुलना में 35-40 प्रतिशत अधिक उपज और 0.5 इकाई अधिक चीनी प्राप्त होती है. सामान्य विधि की तुलना में इस विधि से पेड़ी गन्ने की पैदावार 20-25 प्रतिशत अधिक होती है.
ये भी पढ़ें: Turmeric Cultivation: हल्दी की फसल के लिए जानलेवा है थ्रिप्स कीट, किसान ऐसे करें बचाव
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today