Kharif Sowing: खरीफ बुवाई 17.69 लाख हेक्‍टेयर पीछे, धान रकबे में सबसे ज्‍यादा गिरावट, पढ़ें रिपोर्ट

Kharif Sowing: खरीफ बुवाई 17.69 लाख हेक्‍टेयर पीछे, धान रकबे में सबसे ज्‍यादा गिरावट, पढ़ें रिपोर्ट

खरीफ 2026-27 में 4 सितंबर तक कुल बुवाई रकबा 1,086.31 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल से 17.69 लाख हेक्टेयर कम है. धान के रकबे में सबसे ज्‍यादा गिरावट दर्ज की गई है. पढ़‍िए पूरी रिपोर्ट...

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खरीफ बुवाई 17.69 लाख हेक्‍टेयर पीछे, धान रकबे में सबसे ज्‍यादा गिरावट, पढ़ें रिपोर्टखरीफ की बुवाई पि‍छड़ी

खरीफ सीजन 2026-27 में देशभर में फसलों की बुवाई का कुल रकबा पिछले साल के मुकाबले घट गया है. कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की 4 सितंबर तक की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल अब तक कुल 1,086.31 लाख हेक्टेयर में खरीफ फसलों की बुवाई हुई है, जबकि 2025-26 में इसी अवधि तक 1,104.00 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हो चुकी थी. यानी कुल रकबा 17.69 लाख हेक्टेयर घटा है और सालाना आधार पर 1.60 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है.  

धान का रकबा 16.37 लाख हेक्टेयर घटा

खरीफ की सबसे प्रमुख फसल धान भी इस गिरावट से अछूता नहीं है. 2026-27 में अब तक धान की बुवाई 421.82 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल यह 438.19 लाख हेक्टेयर थी. इस तरह धान का रकबा 16.37 लाख हेक्टेयर कम हुआ है और इसमें 3.74 फीसदी की गिरावट आई है. हालांकि, धान का मौजूदा क्षेत्र 412 लाख हेक्टेयर के सामान्य क्षेत्र से ऊपर है, लेकिन पिछले साल के स्तर से थोड़ा नीचे है. 

मक्का में भी 2.99 लाख हेक्टेयर की कमी

रिपोर्ट के मुताबिक, मक्का की बुवाई भी पिछले साल की तुलना में कमजोर रही है. इस साल 91.09 लाख हेक्टेयर में मक्का बोया गया है, जबकि 2025-26 में यह क्षेत्र 94.08 लाख हेक्टेयर था. यानी रकबा 2.99 लाख हेक्टेयर घटा है और सालाना गिरावट 3.18 फीसदी रही है. गौर करने वाली बात यह है कि मक्का का सामान्य क्षेत्र 80.77 लाख हेक्टेयर है, इसलिए मौजूदा बुवाई सामान्य स्तर से ऊपर है, लेकिन पिछले साल की तुलना में कम है. 

दलहन फसलों ने संभाली स्थिति

अनाज की प्रमुख फसलों के मुकाबले दालों का प्रदर्शन बेहतर रहा है. कुल दालों का रकबा 2025-26 के 115.30 लाख हेक्टेयर से बढ़कर इस साल 117.13 लाख हेक्टेयर हो गया है. यानी 1.84 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी के साथ इसमें 1.60 फीसदी का इजाफा हुआ है. हालांकि, सामान्य क्षेत्र 123.63 लाख हेक्टेयर है, इसलिए मौजूदा बुवाई अभी सामान्य स्तर से नीचे है.

उड़द और अरहर में बढ़ी बुवाई

दलहनी फसलों में उड़द ने अच्छी बढ़त दर्ज की है. उड़द का रकबा पिछले साल के 22.46 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 25.15 लाख हेक्टेयर हो गया है यानी 2.68 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी (11.95 फीसदी) का उछाल आया है. वहीं, अरहर की बुवाई भी 44.93 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 45.66 लाख हेक्टेयर हो गई है, जबकि मूंग का रकबा 34.23 लाख से घटकर 33.19 लाख हेक्टेयर रह गया है. 

कपास का रकबा भी पिछले साल से कम

कपास को लेकर भी इस बार तस्वीर बढ़त वाली नहीं है. 2026-27 में कपास की बुवाई 109.17 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल 109.87 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई थी. यानी इसमें 0.69 लाख हेक्टेयर की कमी (0.63 फीसदी) की गिरावट है. कपास का सामान्य क्षेत्र 125.51 लाख हेक्टेयर है. मौजूदा बुवाई सामान्य क्षेत्र से भी काफी नीचे है. 

सोयाबीन में भी हल्की गिरावट

सोयाबीन का रकबा भी पिछले साल के मुकाबले घटा है. इस साल 121.82 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन बोया गया है, जबकि 2025-26 में यह 122.98 लाख हेक्टेयर था. यानी 1.16 लाख हेक्टेयर की कमी के साथ रकबा 0.94 फीसदी घटा है. इसका सामान्य क्षेत्र 128.71 लाख हेक्टेयर है, जिससे साफ है कि सोयाबीन की मौजूदा बुवाई सामान्य क्षेत्र से भी पीछे है. 

तिल और सूरजमुखी में बढ़त

वहीं, तिलहन की बुवाई भी कमजोर रही है, लेकिन कुछ फसलों ने शानदार प्रदर्शन किया है. तिल का रकबा 9.50 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 10.94 लाख हेक्टेयर हुआ है और इसमें 15.15 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. सूरजमुखी की बुवाई 0.64 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 1.25 लाख हेक्टेयर हो गई है, जिससे इसमें 95.69 फीसदी की बढ़त दर्ज हुई है. 

तिलहन का रकबा भी पिछड़ा

तिल और सूरजमुखी की बढ़त के बावजूद कुल तिलहन क्षेत्र पिछले साल से कम है. 2026-27 में कुल 191.99 लाख हेक्टेयर में तिलहन बोया गया है, जबकि पिछले साल यह 193.06 लाख हेक्टेयर था. यानी 1.07 लाख हेक्टेयर की कमी और 0.56 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई है. सोयाबीन और मूंगफली जैसे तिलहन फसलों के घटे रकबे ने कुल आंकड़े को नीचे खींचा है. 

इधर, मोटे अनाजों में भी मिला-जुला रुझान सामने आया है. ज्वार का रकबा 12.61 से बढ़कर 13.58 लाख हेक्टेयर और बाजरा 62.87 से बढ़कर 64.86 लाख हेक्टेयर हो गया है. इसके उलट रागी 8.77 से घटकर 7.60 लाख हेक्टेयर रह गई है. कुल श्री अन्न और मोटे अनाजों का क्षेत्र 182.48 से घटकर 181.39 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है. 

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