
महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में किसान कुछ ऐसा करने वाले हैं जो देश के दूसरे हिस्से के किसानों को कुछ नया करने के लिए प्रेरित कर सकता है. यहां के किसान नेवासा तालुका के गन्ना स्टोरेज एरिया में रबी सीजन में प्याज की खेती कर रहे हैं. दिसंबर-2025 के आखिर तक किसानों ने 8,507 हेक्टेयर जमीन पर प्याज की खेती कर डाली है.किसानों का कहना है कि इस तरह से खेती करने से फसल अच्छी हो रही है और उन्हें अब यह आइडिया भी अच्छा लग रहा है. किसानों का यह तरीका कृषि विशेषज्ञों का भी दिल जीत रहा है.
लोकमत की रिपोर्ट के अनुसार किसान इसी जमीन पर दो महीने और प्याज की खेती करेंगे. पिछले साल किसानों ने 23,217 हेक्टेयर जमीन पर प्याज की खेती की थी. गन्ने की फसल के बाद किसान गेहूं या प्याज उगाते हैं. इस समय गांव में लगाए गए प्याज टिकाऊ होते हैं. इसलिए उन्हें स्टोर किया जा सकता है. अच्छे दाम मिलने पर किसान प्याज बेचते हैं. पिछले साल की तुलना में इस बार प्याज की पैदावार से किसानों को कम इनकम हुई लेकिन प्याज उगाने वालों को इस बार अच्छी इनकम की उम्मीद है.
एक एकड़ प्याज की फसल पर औसतन 55 से 65 हजार रुपये का खर्च आता है. इसमें 5,000 रुपये की प्री-प्लांटिंग खेती, 13 से 15,000 रुपये की प्याज की पौध, 12 से 14,000 रुपये की प्याज की पौध, 16,000 रुपये की दो डोज, 1.5 हजार रुपये का हर्बिसाइड स्प्रे, 10,000 रुपये का फंगीसाइड, 13,000 रुपये की प्याज की तुड़ाई शामिल है. अगर 2,000 रुपये प्रति क्विंटल कीमत मिल जाए तो ही प्याज की खेती सस्ती है.
एक किसान ने बताया कि गन्ना की फसल टूटने के बाद दो एकड़ में प्याज लगाया. प्याज की पौध घर पर ही तैयार की थी. लेकिन इस बीच बेमौसम बारिश के कारण प्याज के पौधे प्रभावित हुए. किसानों ने जो चार फुट के प्याज के पौधे लगाए थे, उनमें से सिर्फ दो ही एकड़ में प्याज लगा. एक एकड़ में हमेशा एक फुट में प्याज लगाया. किसान के अनुसार प्याज की कीमत 20 रुपये प्रति किलो है तो ही यह सस्ता है.
एक और किसान ने बताया कि उन्होंने तीन एकड़ जमीन पर गन्ने की फसल में प्याज की फसल लगाई है. मॉडर्न तरीके से खेती सस्ती है. प्याज के बाजार में दलालों का दबदबा है. इससे किसानों को दिक्कत होती है. युवा किसानों को एक साथ आकर खेती करके दूसरे किसानों को गाइड करना चाहिए.
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