गेहूं की उन्नत किस्मेंगेहूं हमारी रोज की थाली तक पहुंचने वाला सबसे जरूरी अनाज में से एक है. रोटी, पराठा और दलिया- सब गेहूं से ही बनते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर गेहूं एक जैसा नहीं होता? जैसे बच्चों की कक्षा अलग-अलग होती है, वैसे ही गेहूं की भी कई किस्में होती हैं. अगर किसान सही किस्म चुन ले, तो कम मेहनत में ज्यादा गेहूं पैदा कर सकता है.
सूखे वाले राज्य में मौसम, जमीन और पानी हर जगह एक जैसा नहीं होता. कहीं जमीन खारी है, कहीं पानी कम है और कहीं बुवाई देर से होती है. ऐसे में पुरानी किस्मों से अच्छी फसल नहीं मिल पाती. इसी समस्या को दूर करने के लिए वैज्ञानिकों ने बौनी और उन्नत गेहूं की किस्में बनाई हैं. ये किस्में कद में छोटी होती हैं, लेकिन ताकत में बहुत बड़ी होती हैं. इनमें ज्यादा कल्ले निकलते हैं, दाने मोटे और चमकदार होते हैं और रोग भी कम लगते हैं.
राज 1482 गेहूं की एक अच्छी बौनी किस्म है. इसके पौधों में बहुत सारे कल्ले निकलते हैं, जिससे फसल घनी होती है. यह गेहूं सही समय पर बोया जाता है और बाकी किस्मों से थोड़ा पहले पक जाता है. इस किस्म में रोग कम लगते हैं, इसलिए फसल सुरक्षित रहती है. इसके दाने गोल, सख्त और सुनहरे रंग के होते हैं. किसान इस किस्म से एक हेक्टेयर खेत में लगभग 45 से 50 क्विंटल गेहूं पैदा कर सकते हैं. यही वजह है कि यह किस्म किसानों को पसंद आती है.
राज 3077 भी गेहूं की बौनी किस्म है, लेकिन इसके पौधे थोड़े लंबे और बहुत मजबूत होते हैं. तेज हवा या पानी से यह फसल गिरती नहीं है. इसके दाने शरबती रंग के और सख्त होते हैं. इस किस्म की खास बात यह है कि इसे समय पर और देर से, दोनों तरह से बोया जा सकता है. नमकीन या साधारण जमीन में भी यह अच्छी तरह उग जाती है. किसान इससे 50 से 60 क्विंटल तक पैदावार ले सकते हैं, जो बहुत अच्छी मानी जाती है.
डब्ल्यू एच 147 किस्म के पौधे ज्यादा ऊंचे नहीं होते और इसकी बालियां सफेद होती हैं. यह किस्म उन खेतों के लिए अच्छी है, जहां पानी की सही व्यवस्था होती है. इसके दाने बड़े, सख्त और शरबती रंग के होते हैं. यह किस्म अच्छी देखभाल में 40 से 50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज देती है. जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा है, उनके लिए यह किस्म बहुत फायदेमंद है.
खारचिया 65 गेहूं की एक खास किस्म है. इसे राजस्थान में ही बनाया गया है. यह किस्म उन खेतों में भी उग सकती है, जहां जमीन बहुत ज्यादा खारी या क्षारीय होती है. ऐसी जमीन में दूसरी किस्में ठीक से नहीं उग पातीं, लेकिन खारचिया 65 हर साल अच्छी फसल देती है. इसके दाने लाल रंग के होते हैं. खारी जमीन में भी इससे 15 से 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज मिल जाती है, जो किसानों के लिए बहुत बड़ी बात है.
राज 3765 किस्म उन किसानों के लिए है, जो किसी कारण से समय पर गेहूं नहीं बो पाते. इसे दिसंबर के तीसरे हफ्ते तक भी बोया जा सकता है. इसके पौधे मजबूत होते हैं और गर्मी को भी सहन कर लेते हैं. इसके दाने चमकदार, सख्त और अच्छे आकार के होते हैं. यह किस्म रोगों से भी बचाव करती है. सही देखभाल से किसान इससे 40 से 50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पैदावार ले सकते हैं.
हर खेत और हर जमीन एक जैसी नहीं होती. इसलिए किसान को अपनी जमीन और समय के अनुसार गेहूं की किस्म चुननी चाहिए. सही किस्म चुनने से फसल अच्छी होती है, मेहनत कम लगती है और आमदनी बढ़ती है. यही उन्नत खेती का सही तरीका है.
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