अमरूद खाना हर किसी को पसंद है. यह एक एनर्जी फ्रूट है. सर्दी के मौसम में लोग बहुत ही चाव से अमरूद को खाते हैं. वहीं, अच्छे और ताजे अमरूद की कीमत बाजारों में महेशा 60 से 80 रुपये किलो होती है. ऐसे में अगर किसान अमरूद की खेती करते हैं तो अच्छी कमाई कर सकते हैं. लेकिन अमरूद की खेती करने के लिए उसे उन्नत किस्मों का चयन करना किसानों के लिए कठिन काम है क्योंकि अगर किसान अच्छी किस्मों की खेती नहीं करते हैं तो उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है. ऐसे में आज हम आपको अमरूद की एक नई किस्म की जानकारी देंगे, जो बंपर उपज देगी. साथ ही इस किस्म के फल ज्यादा दिनों तक खराब भी नहीं होंगे. आइए जानते हैं इस किस्म की खासियत.
बात करें इस नई किस्म की तो इसका नाम अर्का पूर्णा है. इस किस्म के अमरूद बंपर उपज देते हैं. इसलिए मध्यम से उच्च घनत्व वाली रोपाई के लिए उपयुक्त होते हैं. इसके फल गोल और बड़े आकार के यानी 200-250 ग्राम के होते हैं. साथ ही इस किस्म का स्वाद भी बहुत अच्छा होता है. इसके अलावा इस किस्म के फल लंबे समय तक खराब नहीं होते हैं. ये किस्म आयात निर्यात में भी जल्दी खराब नहीं होती है.
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अमरूद एक ऐसी फसल है, जिसकी खेती किसी भी तरह के वातावरण में की जा सकती है. इसकी खेती किसी भी तरह की मिट्टी में की जा सकती है. इसे 5 डिग्री से लेकर 45 डिग्री तक के तापमान में उगाया जा सकता है. इसलिए किसान पूरे भारत में इसकी खेती कर सकते हैं. अमरूद की खेती एक बार शुरू करने पर कई सालों तक मुनाफा मिलता रहता है. वहीं, अमरूद की बागवानी करने से पहले खेतों में 8 फीट की दूरी पर गड्ढा बना लेना चाहिए और उस गड्ढे में सड़ा हुआ गोबर और अन्य जैविक खाद डाल कर पौधों को लगाना चाहिए.
अमरूद की खेती करते समय ये ध्यान दें कि पौधों को हमेशा एक पंक्ति में 8 फीट की दूरी पर ही लगाएं. इससे पौधों को पर्याप्त मात्रा में हवा, पानी और धूप मिलते हैं, जिससे फसल की ग्रोथ अच्छी होती है. वहीं, दो पंक्तियों के बीच 10 से 12 फीट की दूरी भी होनी चाहिए. ऐसे में आपको पौधे के ऊपर कीटनाशकों का छिड़काव करने में किसी भी तरह की परेशानी नहीं होगी. फल की तुड़ाई करना भी आसान हो जाएगा. ऐसा करने से एक एकड़ में अमरूद के करीब 100 पौधे लगा सकते हैं.
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