धान की खेती में पिछड़ रहा झारखंड फोटोः किसान तकझारखंड एक बार खरीफ सीजन में सूखे के संकट से जूझ रहा है. लगातार यह तीसरा फसल सीजन है जब किसानों को सूखे का सामना करना पड़ रहा है. इसके कारण किसानों के समक्ष विपरित परिस्थिति आ गई है. झारखंड में खरीफ सीजन में सबसे अधिक धान की खेती होती है. धान की खेती यहां के किसानों की कमाई का एक प्रुमख जरिया होता है पर किसानों को अपनी महत्वपूर्ण फसल पर मौसम की मार का सामना करना पड़ रहा है. राज्य में हो रही बारिश की कमी के कारण धान की खेती सबसे अधिक प्रभावित हुई है. आंकड़ों की बात करें तो राज्य में अब तक केवल 13 फीसदी ही धान की रोपाई हो पाई है. इसके कारण किसानों में मायूसी है.
मौसम विभाग की तरफ से जारी किए गए आंकड़ों में मुताबिक अब तक राज्य में मात्र 47 फीसदी ही बारिश हुई है जबकि आधा सावन बीत चुका है. बारिश नहीं होने के कारण अब हालात यह है कि कई जगह पर धूप के कारण धान के बिचड़ों के सूखने की खबरें आ रही हैं. बारिश के आंकड़ों की बात करें तो सामान्य बारिश होने पर राज्य में अब तक 434 एमएम बारिश होनी चाहिए थी, पर अभी तक मात्र 236 एमएम बारिश की राज्य में हो पाई है. इसके कारण धान की खेती काफी पिछड़ गई है. झारखंड में इस साल 18 लाख हेक्टेयर में धान की खेती करने का लक्ष्य रखा गया था पर अभी तक मात्र 2.30 लाख हेक्टेयर में ही धान की रोपाई हो पाई है.
इस साल सबसे खराब स्थिति झारखंड के छह जिलों की है जहां पर 60 फीसदी से अधिक की बारिश की कमी दर्ज की गई है. इनमें चतरा, लातेहार, लोहरदगा, गिरिडीह, धनबाद और जामताड़ा की है. इन जिलों में धान की रोपाई बिल्कुल नहीं हो पाई है. जबकि राज्य के 17 जिले ऐसे हैं जहां पर सामान्य से कम बारिश हुई है. हालांकि मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 28 जुलाई के बाद तीन अगस्त तक सामान्य बारिश होने की संभावना है. इसके अलावा तीन से आठ अगस्त तक भी राज्य में सामान्य बारिश का अंदाजा लगाया गया है. संथाल का जिला साहेबगंज उन कुछ जिलों में शामिल है जहां पर लगभग सामान्य बारिश हुई है.
झारखंड लगातार इस सूखे के संकट का सामना करना पड़ रहा है. पिछले वर्ष भी राज्य में सामान्य से कम बारिश हुई थी. इसके कारण राज्य के 226 प्रखंडों में गंभीर सूखा पड़ा था. सूखे के कारण धान की खेती प्रभावित हुई थी. इस साल भी किसानों को लग रहा है. पिछली बार की तरह इस बार भी धान की खेती में पिछड़ जाएगे और उनकी कमाई पर इसका असर पडेगा क्य़ोंकि धान की खेती से किसानों की बड़ी उम्मीदे जुडी होती हैं.
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