आमतौर पर भेड़ की पहचान ऊन से की जाती है. माना भी यही जाता है कि भेड़ पालन ऊन के लिए होता है. लेकिन कई बड़े कारणों के चलते भेड़ से मिलने वाली ऊन की डिमांड और रेट दोनों ही कम हो गए हैं. ऊन का बाजार अब ना के बराबर रह गया है. लेकिन भेड़ों की 40 से भी ज्यादा नस्लइ के बीच एक ऐसी खास नस्ल है जिसकी अभी भी बहुत डिमांड है. बेशक इस नस्ल की भेड़ से मिलने वाली ऊन किसी काम नहीं आती है, लेकिन इसका मीट देशभर में पसंद किया जाता है. इसकी एक बड़ी खासियत ये भी है कि दूसरी नस्ल की भेड़ों के मुकाबले ये नस्ल 100 किलो के वजन तक पहुंच जाती हैं. हम जिस खास मुजफ्फरनगरी भेड़ की बात कर रहे हैं वो मूल रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश की है.
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