बलिया के उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. एस.डी द्विवेदी (Photo-Kisan Tak)Cattle Farmers Story: खेती के साथ किसानों की आय बढ़ाने का मुख्य साधन पशुपालन है. अगर आप बकरी पालन शुरू करना चाह रहे हैं तो आप बरबरी प्रजाति की बकरी पालकर लाखों रुपये का मुनाफा कमा सकते हैं. किसान तक से बातचीत में बलिया के उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. एस.डी द्विवेदी ने बताया कि बरबरी नस्ल की बकरी सबसे बेहतर मानी जाती है. बरबरी बकरी छोटे कद की होती है लेकिन इसका शरीर काफी गठीला होता है. शरीर पर सफेद रंग के साथ भूरा और सुनहरा रंग का धब्बा पाया जाता है. इसकी नाक बहुत ही छोटी और कान खड़े हुए होते हैं. बिल्कुल हिरन की तरह से नजर आते है. बरबरी नस्ल की बकरी का मांस बहुत ज्यादा स्वादिष्ट होता है, इसलिए इसकी मार्केट में डिमांड बहुत अधिक रहती है. यह बकरी एक दिन में एक किलो दूध तो देती ही है.
डॉ. द्विवेदी बताते हैं कि इस बकरी को कम लागत में और किसी भी स्थान पर पाला जा सकता है. इनका रख-रखाव भी काफी आसान होता है. बाजार में इसके मांस की अच्छी कीमत भी मिलती है और बकरीद में पशुपालकों को इसके अच्छे रेट मिलते हैं. उन्होंने बताया कि पशुपालन विभाग भी बरबरी नस्ल की बकरियों को पालने का बढ़ावा देते है. अगर कोई किसान इस नस्ल की बकरियों का पालन फार्म बनाकर करेगा तो उसकी सालाना कमाई लाखों में हो सकती है. बरबरी नस्ल आज यूपी की खास पहचान बन चुकी है.
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. एस.डी द्विवेदी ने आगे बताया कि इन नस्ल की बकरियों को बीमारी भी कम होती है. इनको चराने के लिए बाहर नहीं ले जाना पड़ता है, गाय की तरह बंधकर रख सकते हैं. ये एक साल में बिकने के लिए तैयार हो जाती हैं. अन्य बकरियों के मुकाबले यह बकरियां ज्यादा फुर्तीली होती है. वहीं बरबरी नस्ल की बकरियां ज्यादातर उत्तर प्रदेश के एटा, मैनपुरी, इटावा, आगरा, मथुरा और इससे लगे क्षेत्रों में ज्यादा पाली जाती हैं.
डॉ. द्विवेदी ने बताया कि किसी साधारण नस्ल की बकरी को बरबरी के साथ क्रास कराया जाता है, जिससे इनकी संख्या में बढ़ोतरी हो सके. यह 13 से 14 महीने की उम्र पर बच्चा देने लायक हो जाती है. वहीं 15 महीने में दो बार बच्चे देती है. उन्होंने बताया कि मेल बरबरी की कीमत 8 से 9 हजार के बीच होती है, जबकि फीमेल बरबरी की 5-6 हजार हैं. इनका वजन 30 से 40 किलो तक पहुंच जाता है. उन्होंने बताया कि 900 से 1000 रुपये प्रति किलो के रेट से इसका मास आसानी से बिक जाता है. इससे पशुपालकों को बहुत बड़ा मुनाफा होता है. डॉ. एस.डी द्विवेदी ने किसानों को बरबरी नस्ल की बकरी को पालने की सलाह दी. जिससे उनकी आय में दोगुनी बढ़ोतरी हो सके.
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