
देश इस समय चरम मौसम के दोहरे असर से गुजर रहा है. एक ओर उत्तर और मध्य भारत में तेज लू का दौर शुरू हो गया है, वहीं पूर्वोत्तर और कई अन्य राज्यों में भारी बारिश, आंधी और ओलावृष्टि ने हालात बिगाड़ दिए हैं. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने कई राज्यों के लिए चेतावनी जारी करते हुए लोगों और किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है. देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम पूरी तरह विपरीत बना हुआ है. असम और अरुणाचल प्रदेश में कई स्थानों पर 12 से 20 सेंटीमीटर तक भारी बारिश दर्ज की गई है, जबकि नगालैंड में भी अच्छी बारिश हुई है. वहीं महाराष्ट्र के मराठवाड़ा, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और मध्य भारत के हिस्सों में 50 से 80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलीं. कई क्षेत्रों में 30 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से झोंके भी दर्ज किए गए, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ.
इधर, दिल्ली समेत हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लू का असर तेजी से बढ़ रहा है. यहां तापमान 41 से 44 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है. लोगों को धूप में ज्यादा देर तक बाहर न निकलने, पर्याप्त पानी पीने और शरीर को ढककर रखने की सलाह दी गई है.
IMD के मुताबिक, उत्तर भारत के पहाड़ी क्षेत्रों में एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने वाला है, जिससे जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और लद्दाख में 24 से 26 अप्रैल के बीच बारिश और बर्फबारी की संभावना है. वहीं, मध्य प्रदेश, विदर्भ और छत्तीसगढ़ में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं. इसके अलावा कई इलाकों में तापमान भी 40 से 45 डिग्री के बीच बना रहेगा.
मौसम विभाग ने कहा कि पूर्वोत्तर भारत में लगातार भारी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है. असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश के चलते बाढ़, भूस्खलन और यातायात बाधित होने का खतरा बढ़ गया है. वहीं, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ बारिश होने के आसार हैं.
महाराष्ट्र, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में भी मौसम अस्थिर बना रहेगा. यहां कहीं-कहीं आंधी-बारिश और ओलावृष्टि देखने को मिल सकती है. तटीय इलाकों में गर्म और उमस भरा मौसम लोगों की परेशानी बढ़ा सकता है.
महाराष्ट्र और गुजरात के किसान गर्मी के असर को कम करने के लिए हल्की और बार-बार सिंचाई करें. सब्जियों और बागवानी फसलों में मल्चिंग और शेड नेट का उपयोग करें.
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के किसान ओलावृष्टि और तेज हवाओं से बचाव के लिए फसलों को सहारा दें. खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था रखें और पकी फसल की जल्द कटाई करें.
आंधी और बिजली गिरने की संभावना को देखते हुए खुले में काम करने से बचें. खेतों में खड़ी फसलों को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें बांधकर रखें और कटाई के बाद सुरक्षित स्थान पर रखें.
भारी बारिश को देखते हुए खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने की व्यवस्था करें. कटाई की गई फसलों को सुरक्षित स्थान पर रखें और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहें.
लू के प्रभाव को कम करने के लिए सुबह या शाम के समय सिंचाई करें. पशुओं के लिए पर्याप्त पानी और छाया की व्यवस्था सुनिश्चित करें.
तमिलनाडु, केरल और आंध्र प्रदेश में उमस भरे मौसम के बीच फसलों में नमी बनाए रखने के लिए हल्की सिंचाई और मल्चिंग अपनाएं.
भारी बारिश या तेज गर्मी के दौरान पशुओं को शेड में रखें. साफ पानी और संतुलित आहार दें. चारे को सुरक्षित स्थान पर रखें ताकि खराब न हो. आईएमडी ने कहा है कि तेज हवाओं और ओलावृष्टि से पेड़ गिरने, बिजली लाइनों को नुकसान और फसलों को भारी नुकसान हो सकता है.
वहीं भारी बारिश से जलभराव, ट्रैफिक बाधा और भूस्खलन जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं. लोगों को सलाह दी गई है कि खराब मौसम के दौरान घर के अंदर रहें, पेड़ों के नीचे शरण न लें और बिजली के उपकरणों से दूरी बनाए रखें.