El Nono: जून में एक्टिव हो सकता है अल नीनो, भारत में भीषण गर्मी और सूखे का खतरा बढ़ा

El Nono: जून में एक्टिव हो सकता है अल नीनो, भारत में भीषण गर्मी और सूखे का खतरा बढ़ा

ऑस्ट्रेलिया के BoM और IMD के अनुसार जून 2026 से अल नीनो एक्टिव हो सकता है, जिससे भारत में भीषण गर्मी, सूखा और मौसम में बड़े बदलाव की आशंका है.

अल नीनो को लेकर बड़ा अपडेटअल नीनो को लेकर बड़ा अपडेट
क‍िसान तक
  • New Delhi ,
  • Jan 21, 2026,
  • Updated Jan 21, 2026, 1:21 PM IST

जून में अल नीनो के एक्टिव होने की संभावना है. इसके सक्रिय होने से सूखे के हालात बन सकते हैं. पिछले ENSO (अल नीनो सदर्न ऑसिलेशन) घटनाओं के डेटा से पता चलता है कि मई तक इसके एक्टिव होने का पूर्वानुमान मुश्किल है. इसलिए अल नीनो आएगा भी तो इसकी संभावना जून से ही बन सकती है. ऑस्ट्रेलिया के ब्यूरो ऑफ मेट्रोलॉजी (BoM) ने एक रिपोर्ट में इस बात की जानकारी दी है.

BoM ने कहा कि उसके मॉडल से पता चलता है कि ट्रॉपिकल पैसिफिक में समुद्र की सतह का तापमान फरवरी के आखिर तक ENSO की सामान्य स्थिति में वापस आ जाएगा. मार्च और मई तक सामान्य स्थिति बनी रहने की संभावना है. इसके बाद ही अल नीनो की एक्टिविटी में किसी तरह का बदलाव देखने को मिलेगा. 

भारत में क्या होगा असर

अभी जनवरी ही है, और भारत के कई हिस्से सर्दियों में चल रहे हैं. लेकिन तेलंगाना में, कड़ी गर्मी का अलार्म बजना शुरू हो गया है. मौसम विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि 2026 में राज्य में ज्यादा तापमान रहने की उम्मीद है, और संकेत मिल रहे हैं कि इस साल की गर्मी 2023 में झुलसा देने वाली गर्मी से भी ज्यादा खराब हो सकती है, जिससे लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा.

मौसम विभाग के अधिकारियों ने कहा है कि अल नीनो, जो तीन साल पहले भी खराब मौसम के लिए जिम्मेदार था, इस साल भी गर्मी बढ़ा सकता है और मौसम बिगाड़ सकता है. दक्षिण के राज्यों के अलावा बाकी राज्यों में भी अल नीनो की वजह से तेज गर्मी बढ़ सकती है.

इंडिया मेट्रोलॉजिकल डिपार्टमेंट (IMD) इस बात का संकेत दे चुका है कि अल नीनो के असर के कारण 2026 की गर्मियों में तापमान ज्यादा हो सकता है. IMD अधिकारियों ने यह भी बताया है कि 2026 का साल 2025 से ज्यादा गर्म हो सकता है.

अल नीनो और ला नीना

किसी भी क्षेत्र में अल नीनो और ला नीना के एक्टिव होने के लिए ENSO को जिम्मेदार माना जाता है. ENSO का साइकल ला नीना और अल नीनो के बीच चलता है जिससे कभी ला नीना तो कभी अल नीनो की स्थिति बनती है. हर एक से तीन साल बाद इन दोनों वेदर सिस्टम की एक्टिविटी दर्ज की जाती है. यहां ला नीना का संबंध कूल फेज से है जबकि अल नीनो गर्म फेज को दर्शाता है. यानी अल नीनो बढ़ने से गर्मी और सूखा बढ़ता है जबकि ला नीना ठंड और बर्फबारी को बढ़ाता है.

अभी, ENSO ला नीना स्थिति में है, लेकिन 2026 की गर्मियों तक का पूर्वानुमान इसके उलट, अल नीनो स्थिति का संकेत दे रहा है. उत्तरी अमेरिका के मौसम के पैटर्न पर इसका असर साफ दिखेगा. भारत में भी गर्मियां बढ़ सकती हैं और सूखे जैसे हालात बन सकते हैं जैसा कि 2023 में देखा गया था.

अगर उम्मीद के मुताबिक अल नीनो बनता है, तो यह शायद 2026 के आखिर में हालात पर जोरदार असर डालेगा, और अगली सर्दियों के लिए बहुत अलग पैटर्न बनेंगे.

तूफान का मौसम

अल नीनो का असर गर्मियों और पतझड़ के मौसम में महसूस होना शुरू हो सकता है. इसका सबसे बड़ा असर तूफान के मौसम पर पड़ने की संभावना है. हालांकि अभी तूफान का कोई भी नंबर बताने का समय नहीं आया है, लेकिन हम कम से कम तूफानों पर अल नीनो के आम असर को नोट कर सकते हैं.

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