
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट पर विधानसभा में हुई चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि कृषि एक्सपोर्ट सपोर्ट मिशन के लिए बजट में घोषणा की गई है. यूपी के किसानों का उत्पाद ग्लोबल मार्केट में पहुंच जाए, उसके लिए पहले चरण में 100 करोड़ रुपये का प्रावधान बजट में किया है. पिछली बार हम लोगों ने कहा था कि यूपी में 40 लाख ट्यूबवेल हैं. सपा के समय सब भगवान भरोसे था, न बिजली आती थी और न ट्यूबवेल चलता था. किसी तरह किसान खेती कर पाता था. उन्होंने कहा कि हम बिजली कनेक्शन से जुड़े 16 लाख ट्यूबवेल वाले किसानों को फ्री में बिजली दे रहे. इस पर सरकार हर वर्ष तीन हजार करोड़ रुपये खर्च कर रही है. योगी ने सदन से अनुपस्थित तत्कालीन सिंचाई मंत्री शिवपाल सिंह यादव के कार्यों का जिक्र करते हुए उन पर कटाक्ष भी किया.
सीएम योगी ने सिंचाई क्षमता में विस्तार की भी चर्चा की. कहा कि बाणसागर, अर्जुन सहायक, सरयू नहर, मध्य गंगा परियोजना पर सरकार कार्य कर चुकी है या कर रही है. लाखों हेक्टेयर भूमि को सिंचाई की सुविधा भी दी है, लेकिन ऐसे ट्यूबवेल, जहां किसान आज भी डीजल से पंपिंग सेट चला करके सिंचाई करता है, उन ट्यूबवेल को सोलर पैनल देने की व्यवस्था करने जा रहे हैं. उस दिशा में 2,000 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है. सरकार ने किसान को टेक्नोलॉजी के साथ जोड़ा है.
बजट पर विधानसभा में बोलते हुए उन्होंने कहा कि सिंचाई की क्षमता को बढ़ाया गया, विस्तार किया गया, सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना कब से लंबित पड़ी हुई थी,शिवपाल जी इसीलिए भाग गए, उनको मालूम था ये नाम आएगा, सिंचाई मंत्री के रूप में उन्होंने क्या काम किया है,कल वो टिप्पणी कर रहे थे स्वतंत्र देव जी पर..
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2017 में जब लघु एवं सीमांत किसानों की कर्जमाफी का निर्णय लिया गया, तब भी सवाल उठे थे कि संसाधन कहां से आएंगे. सरकार ने किसी बैंक या वित्तीय संस्था से ऋण लिए बिना, बजट संसाधनों से 86 लाख किसानों के एक लाख रुपये तक के कर्ज माफ किए. यह वित्तीय अनुशासन और संसाधनों के कुशल प्रबंधन का उदाहरण है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने पीएलए (पर्सनल लेजर अकाउंट) प्रणाली में सुधार कर अनावश्यक रूप से धन के डंप होने की प्रवृत्ति को रोका. योजनाओं के लिए आवश्यकतानुसार ही धन जारी किया जा रहा है, जिससे वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हुई है. उन्होंने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक की गाइडलाइन का अक्षरशः पालन किया जा रहा है. वित्तीय अनुशासन के कारण ही राजकोषीय प्रबंधन संतुलित हुआ है और विकास परियोजनाओं को गति मिली है.
सीएम योगी ने बताया कि वर्ष 2016-17 में प्रदेश का क्रेडिट-डिपॉजिट (सीडी) रेशियो लगभग 43-44 प्रतिशत था, जो अब बढ़कर 61-62 प्रतिशत तक पहुंच चुका है. इसका अर्थ है कि उत्तर प्रदेश के नागरिकों द्वारा बैंकों में जमा किया गया धन अब अधिक मात्रा में प्रदेश के भीतर ही निवेश हो रहा है. इससे स्थानीय स्तर पर उद्योग, व्यापार और स्वरोजगार के अवसर बढ़े हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने बड़े लक्ष्य निर्धारित किए हैं और उनके अनुरूप ही परिश्रम भी किया जा रहा है. वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और पूंजीगत निवेश की रणनीति ने प्रदेश की विकास यात्रा को नई दिशा दी है.
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