
झारखंड में इस बार मॉनसून की बेरुखी के कारण खरीफ फसल खास कर धान की खेती का रकबा काफी कम हुआ है. यह लगातार दूसरी बार है जब राज्य में इस तरह का सूखा पड़ा है. सूखे ने इस बार झारखंड के किसानों की कमर तोड़ दी है. क्योंकि इस बार किसानों के हाथ खाली है. ऐसे में फसल बीमा का लाभ किसानों को देकर उन्हें हुई आर्थिक क्षति को कम करने का प्रयास किया जाएगा. हालांकि झारखंड में बीमा कंपनी और विवाद एक दूसरे से जुड़े हुए हैं, खास कर ऐसे मामले आए हैं जहां फसल की क्षतिपूर्ति के नाम पर बीमा कंपनियों ने किसानों के साथ धोखाधड़ी की है. मुआवजा देने के नाम पर किसानों के साथ यह धोखा होता है और उन्हें पर्याप्त मुआवजा नहीं मिल पाता है.
पर राज्य के किसानों के साथ अब ऐसा नहीं होगा. कृषि मंत्री बादल ने कहा है कि पिछले बार कृषि का बीमा करने वाली कंपनियों ने मुआवजा देने के वक्त धोखाधड़ी की थी, लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा. उन्होंने ने कहा कि इस बार नई शर्तों के साथ बीमा कंपनियां काम करेंगी. झारखंड सरकार राज्य के किसानों के हित से जुड़े मामलों को लेकर काफी संवेदनशील है और किसानों के हित में इस बार बीमा कंपनियों के साथ शर्त में कई बिंदुओं को जोड़ा गया है. साथ ही उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के साथ हुई बात के अनुसार बीमा कंपनियां किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी नहीं कर सकेंगी.
राज्य में इस बार चल रहे सुखाड़ की स्थिति को लेकर कृषि मंत्री ने कहा है कि राज्य के सिर्फ तीन जिलों में सामान्य बारिश हुई है जबकि, 19 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है. वहीं चतरा जिले की स्थिति बेहद गंभीर है. यहां पूरी तरह सूखा पड़ा है. बादल ने बताया कि राज्य में अब तक कुल 47 फीसदी आच्छादन हुआ है, जो औसत से 53 फ़ीसदी कम है. यह एक चिंतनीय बात है कि पहले राज्य में जहां तीन और चार वर्षो के अंतराल में सुखाड़ आता था वहीं अब , पर्यावरण असंतुलन की वजह से लगातार यह दूसरा वर्ष है जब सूखा पड़ा है. जिसने, किसानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं. क्योंकि इसबार औसत से 38 फीसदी बारिश कम हुई है.
कृषि मंत्री ने कहा कि इस बार, जो बारिश की स्थिति है, वह अच्छी नहीं है. बड़े जलाशय के इंडिकेटर अच्छे संकेत नहीं दे रहे हैं वहीं, बुआई का समय अब खत्म हो चुका है. जलस्तर में गिरावट देखी जा रही है. 15 सितंबर तक राज्य के कृषि की बुआई और उपज को लेकर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर ली जाएगी. वहीं किसानों के एनपीए लोन को लेकर सरकार मंथन कर रही है, जल्द ही कोई न कोई रास्ता निकाला जाएगा. बादल ने कहा कि मौसम की मार से किसान निराश हैं और ऐसी स्थिति में हमारा फर्ज है कि किसानों के हित को देखते हुए फैसले लें.