
अमेरिका के साथ प्रस्तावित ट्रेड डील के खिलाफ विपक्षी पार्टियां सड़कों पर उतर गई हैं. गुरुवार को इसके विरोध में किसान संगठनों ने ट्रेड यूनियनों के साथ हड़ताल भी की. विपक्षी दल, ट्रेड यूनियन और किसान संगठनों ने सरकार से मांग की है कि इस डील पर आगे न बढ़ा जाए क्योंकि यह किसान विरोधी है. दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि इस डील में किसानों के हित और खेती को सुरक्षित रखा गया है. इस बीच, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने ट्रेड डील के बहाने केंद्र सरकार पर बड़ा हमला बोला है और कहा है कि वे किसी भी सूरत में यह डील नहीं होने देंगे.
एक वीडियो संदेश में राहुल गांधी ने कहा, FIR हो, मुकदमा दर्ज हो या Privilege प्रस्ताव लाएं - मैं किसानों के लिए लड़ूंगा. जो भी ट्रेड डील किसानों की रोजी-रोटी छीने या देश की खाद्य सुरक्षा को कमजोर करे, वह किसान-विरोधी है. अन्नदाताओं के हितों से किसान-विरोधी मोदी सरकार को समझौता नहीं करने देंगे.
कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार इस डील का विरोध कर रहे हैं. एक दिन पहले लोकसभा में उन्होंने इस डील के खिलाफ सरकार पर हमला बोला और आरोप लगाते हुए कहा कि "आपने भारत को बेच दिया है. क्या आपको भारत को बेचने में शर्म नहीं आती? आपने हमारी मां, भारत माता को बेच दिया है." उन्होंने कहा कि किसानों के हितों से समझौता किया गया है क्योंकि अमेरिका से कृषि उत्पाद भारतीय बाजारों में भर जाएंगे. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भारतीय कपड़ा उद्योग "खत्म" हो गया है.
इससे पहले खबर आई थी कि सरकार राहुल गांधी के खिलाफ Privilege प्रस्ताव ला सकती है क्योंकि सदन में उन्होंने केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी पर गंभीर आरोप लगाए थे. बाद में सूत्रों के हवाले से खबर आई कि राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन की कार्यवाही फिलहाल नहीं होगी.
बीजेपी के चीफ व्हिप संजय जायसवाल ने राहुल गांधी के भाषण के कथित आपत्तिजनक हिस्सों को हटाने के लिए नोटिस दिया है. हालांकि कुछ अंश पहले ही रिकॉर्ड से हटा दिए गए हैं, बीजेपी का मानना है कि यह पर्याप्त नहीं है. दूसरी ओर, केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी पर लगाए गए आरोपों का जवाब वे स्वयं सदन में देंगे.
बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने एक अलग प्रक्रिया के तहत substantive motion दिया है. यदि यह प्रस्ताव स्वीकार होता है, तो सदन में इस पर विस्तृत चर्चा और मतदान होगा. प्रस्ताव पारित होने की स्थिति में राहुल गांधी की सदस्यता तक पर प्रभाव पड़ सकता है.
निशिकांत दुबे ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर राहुल गांधी के कथित “अनैतिक आचरण” की जांच के लिए संसदीय जांच समिति गठित करने की मांग की है. पत्र में राहुल गांधी पर संसद के भीतर और बाहर ऐसे बयान देने का आरोप लगाया गया है, जो देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता के लिए हानिकारक बताए गए हैं.
दुबे ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने 11 फरवरी को लोकसभा में दिए भाषण में पूर्व थलसेनाध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवणे का उल्लेख कर भारतीय सेना और रक्षा प्रतिष्ठानों की छवि को नुकसान पहुंचाया. राहुल गांधी पर विभिन्न मंत्रालयों और भारतीय कॉरपोरेट जगत को लेकर “अप्रमाणित आरोप” लगाकर बैंकिंग व्यवस्था और सरकारी संस्थाओं के प्रति अविश्वास फैलाने का भी आरोप लगाया गया है.
पत्र में राहुल गांधी के विदेशी संगठनों, विशेष रूप से जॉर्ज सोरोस और फोर्ड फाउंडेशन से जुड़े होने और उनकी विदेश यात्राओं की फंडिंग की जांच की मांग की गई है. दुबे ने चुनाव आयोग और सर्वोच्च न्यायालय जैसी संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने के आरोप लगाते हुए राहुल गांधी की संसद सदस्यता समाप्त करने तक की कार्रवाई की मांग की है.