भारत-अमेरिका FTA पर किसान संगठनों का विरोध, कृषि-डेयरी सेक्टर पर समझौता न करने की चेतावनी

भारत-अमेरिका FTA पर किसान संगठनों का विरोध, कृषि-डेयरी सेक्टर पर समझौता न करने की चेतावनी

संयुक्त किसान मोर्चा ने प्रस्तावित भारत‑अमेरिका मुक्त व्यापार समझौता का कड़ा विरोध करते हुए केंद्र सरकार को चेताया है कि कृषि, डेयरी और पोल्ट्री सेक्टर से जुड़े किसी भी समझौते से भारतीय किसानों को नुकसान हो सकता है. संगठन ने कहा कि विदेशी दबाव में कोई फैसला न लिया जाए और किसानों के हितों को प्राथमिकता दी जाए.

The discussions are expected to focus on tariff structures, market access, and regulatory cooperation — key sticking points in previous rounds. The discussions are expected to focus on tariff structures, market access, and regulatory cooperation — key sticking points in previous rounds.
क‍िसान तक
  • New Delhi,
  • Apr 21, 2026,
  • Updated Apr 21, 2026, 7:18 PM IST

प्रस्तावित भारत‑अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है. संगठन ने अमेरिका में चल रहे वार्ता के दूसरे दौर के मद्देनजर केंद्र सरकार और वाशिंगटन गए भारतीय प्रतिनिधिमंडल को चेताते हुए कहा है कि ऐसा कोई भी समझौता न किया जाए, जिससे भारतीय किसानों और कृषि क्षेत्र को नुकसान पहुंचे.

मोर्चा के नेताओं ने स्पष्ट किया कि भारतीय प्रतिनिधिमंडल को कृषि, डेयरी और पोल्ट्री से जुड़े किसी भी मुद्दे पर सहमति नहीं देनी चाहिए. उनका कहना है कि अमेरिका के साथ होने वाली किसी भी डील को बाहरी दबाव से मुक्त होकर और भारतीय किसानों की भावनाओं को ध्यान में रखकर ही अंतिम रूप दिया जाना चाहिए.

संयुक्त किसान मोर्चा का आरोप

संयुक्त किसान मोर्चा ने आरोप लगाया कि बीते कुछ समय से भारत‑अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों में अमेरिका का दबदबा बढ़ता जा रहा है और भारत सरकार अमेरिकी नीतियों के आगे झुकती दिखाई दे रही है. संगठन का कहना है कि भारत अपने आंतरिक मामलों से जुड़े फैसलों में भी अमेरिकी निर्देशों का पालन करने को मजबूर होता नजर आ रहा है.

मोर्चा ने उदाहरण देते हुए कहा कि अमेरिका भारत पर यह तय करने का दबाव बना रहा है कि वह किन देशों से तेल खरीदे और किन देशों से नहीं. हाल ही में ईरान‑इजराइल‑अमेरिका संघर्ष के दौरान ईरान और रूस से तेल खरीदने को लेकर मिली 30 दिन की अमेरिकी अनुमति को बढ़वाने के प्रयास भी विफल रहे, जिससे यह संकेत मिलता है कि भारत अपने हितों से जुड़े फैसलों में भी अमेरिका पर निर्भर होता जा रहा है.

कृषि, डेयरी और पोल्ट्री को रखें बाहर

किसान संगठनों का कहना है कि पहले से संकट झेल रहे भारतीय किसान अमेरिकी कृषि उत्पादों से मुकाबला करने की स्थिति में नहीं हैं. एक ओर अमेरिका भारतीय कृषि, डेयरी और पोल्ट्री उत्पादों पर भारी शुल्क लगाता है, वहीं दूसरी ओर अमेरिकी उत्पादों को भारत में टैक्स फ्री प्रवेश देने का दबाव बना रहा है.

संयुक्त किसान मोर्चा ने केंद्र सरकार से मांग की है कि कृषि, डेयरी और पोल्ट्री क्षेत्रों से जुड़ा कोई भी ऐसा समझौता न किया जाए, जिससे भारतीय किसानों के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो. संगठन ने चेतावनी दी कि यदि सरकार किसानों के हितों के खिलाफ और अमेरिकी हितों को बढ़ावा देने वाला कोई कदम उठाती है, तो देशभर के किसान अमेरिकी उत्पादों को भारत में प्रवेश नहीं करने देंगे.

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