'बासमती GI Tag में मध्‍य प्रदेश की अनदेखी', दिग्विजय सिंह का सरकार को अल्‍टीमेटम, बोले- किसानों को हक नहीं मिला तो…

'बासमती GI Tag में मध्‍य प्रदेश की अनदेखी', दिग्विजय सिंह का सरकार को अल्‍टीमेटम, बोले- किसानों को हक नहीं मिला तो…

बासमती के GI टैग को लेकर सियासत तेज हो गई है. दिग्विजय सिंह ने केंद्र सरकार पर मध्य प्रदेश के किसानों की अनदेखी का आरोप लगाया और कहा कि अगर जल्द फैसला नहीं हुआ तो वह खुद आंदोलन और अनशन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे.

Congress Leader Digvijay SinghCongress Leader Digvijay Singh
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Mar 09, 2026,
  • Updated Mar 09, 2026, 6:15 PM IST

मध्य प्रदेश में बासमती चावल को भौगोलिक संकेतक यानी GI टैग से बाहर रखने का मुद्दा अब तूल पकड़ता जा रहा है. पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्‍विजय सिंह ने केंद्र सरकार पर राज्य के किसानों के साथ भेदभाव का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी है कि अगर उन्हें GI टैग का लाभ नहीं मिला तो वह खुद अनशन पर बैठने के लिए मजबूर होंगे. कांग्रेस नेता ने दोनों सरकारों को जून तक का अल्‍टीमेट दिया है. भोपाल में पत्रकारों से बातचीत करते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि मध्य प्रदेश के किसान लंबे समय से इस मामले में न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं. दिग्‍विजय सिंह ने कहा कि राज्य में कई वर्षों से बासमती धान की खेती हो रही है और यहां की उपज अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अच्छी पहचान रखती है. इसके बावजूद किसानों को GI टैग से मिलने वाले फायदे नहीं मिल पा रहे हैं.

'GI टैग से जुड़े फैसलों में मध्य प्रदेश की अनदेखी'

उन्होंने कहा कि बासमती चावल एक ऐसा कृषि उत्पाद है जिसकी वैश्विक बाजार में हमेशा मजबूत मांग रहती है. इसकी कीमत भी सामान्य चावल के मुकाबले काफी अधिक होती है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में बासमती की कीमत लगभग 304 डॉलर प्रति क्विंटल तक पहुंच जाती है, जिससे साफ है कि यह किसानों के लिए महत्वपूर्ण निर्यात फसल है. पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि GI टैग से जुड़े फैसलों में मध्य प्रदेश की अनदेखी की गई है.

यूपी की 19 किस्‍मों को GI Tag दिया गया: दिग्‍विजय सिंह

उन्होंने कहा कि पहले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन यानी UPA सरकार के दौरान बासमती की कुछ किस्मों को GI मान्यता मिली थी, लेकिन बाद में वर्तमान सरकार के समय इस व्यवस्था में बदलाव हुआ. उन्‍होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की 19 किस्मों को GI मान्यता दी गई, जबकि मध्य प्रदेश के किसानों को अब तक इसमें शामिल नहीं किया गया. दिग्विजय सिंह ने कहा कि यह स्थिति सिर्फ राज्य के किसानों के लिए नुकसानदायक नहीं है, बल्कि देश के बासमती निर्यात पर भी असर डाल सकती है.

'पाकिस्‍तानी बासमती से प्रतिस्‍पर्धा के लिए GI टैग जरूरी'

उन्होंने याद दिलाया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत को पाकिस्तान से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है और ऐसे में बासमती उत्पादन वाले सभी क्षेत्रों को उचित मान्यता मिलना जरूरी है. उन्होंने यह भी बताया कि उषा-1 और 1121 जैसी बासमती किस्में इस क्षेत्र में व्यापक रूप से उगाई जाती हैं और इनकी वैश्विक बाजार में अच्छी मांग है. ऐसे में अगर इन किस्मों को GI टैग के दायरे में नहीं लाया गया तो किसानों को उचित मूल्य और पहचान मिलने में कठिनाई हो सकती है.

कांग्रेस नेता ने पीएम को लिखा पत्र

दिग्विजय सिंह ने बताया कि उन्होंने इस मुद्दे पर 7 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मध्य प्रदेश के किसानों को GI टैग का लाभ दिलाने की मांग की है. साथ ही उन्होंने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से भी इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है. उन्होंने सवाल उठाया कि विदिशा लोकसभा क्षेत्र सहित राज्य के कई हिस्सों में बड़ी संख्या में किसान बासमती की खेती करते हैं. ऐसे में यह समझ से परे है कि उन्हें GI के दायरे से बाहर क्यों रखा जा रहा है.

जून तक का दिया अल्‍टीमेटम

कांग्रेस नेता ने कहा कि जून तक इस मुद्दे का समाधान नहीं हुआ और किसानों को GI टैग का लाभ नहीं मिला तो वह आंदोलन का रास्ता अपनाने से पीछे नहीं हटेंगे. जरूरत पड़ी तो वह किसानों के समर्थन में अनशन पर भी बैठेंगे. इस दौरान उन्होंने अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर भी संकेत दिया. दिग्विजय सिंह ने कहा कि वह अपनी दूसरी राज्यसभा अवधि पूरी होने के बाद आगे संसद की राजनीति में नहीं रहेंगे, लेकिन कांग्रेस के लिए काम करते रहेंगे. (एएनआई)

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