
पंजाब पुलिस ने मंगलवार को 'किसान मजदूर मोर्चा' के बैनर तले प्रदर्शन कर रहे कई किसानों को हिरासत में ले लिया और अमृतसर में राम तीरथ रोड बाईपास पर धरने वाली जगह को खाली करवा दिया. पुलिस ने यह कार्रवाई रविवार शाम को प्रदर्शन शुरू होने के दो दिन बाद, मंगलवार सुबह करीब 5 बजे की. हिरासत में लिए गए लोगों में सरवन सिंह पंधेर जैसे प्रमुख किसान नेता भी शामिल थे. 'दि ट्रिब्यून' ने यह जानकारी दी.
किसान संगठन के नेता गुरबचन सिंह छब्बा ने बताया कि सोमवार देर रात से ही प्रदर्शन स्थल के पास पुलिस की मौजूदगी बढ़ रही थी, जिससे यह संकेत मिल रहा था कि पुलिस कोई बड़ी कार्रवाई कर सकती है. उन्होंने बताया कि हिरासत में लिए गए किसानों को छेहरटा और मत्तेवाल सहित अलग-अलग पुलिस थानों में ले जाया गया.
प्रदर्शनकारियों द्वारा बनाए गए वीडियो, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गए, उनमें पुलिसकर्मियों को किसानों से सड़क खाली करने और ट्रैफिक बहाल करने के लिए कहते हुए देखा जा सकता है. बताया जा रहा है कि पंधेर सड़क खाली करने के लिए तैयार हो गए थे, लेकिन उन्होंने प्रदर्शन जारी रखने के लिए किसी दूसरी जगह की मांग की थी.
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को जबरदस्ती हटाया. उन्हें बसों में खींचकर बिठाया और वहां से ले गई. इस कार्रवाई के बाद सड़क को खाली करवा लिया गया और ट्रैफिक की आवाजाही फिर से शुरू हो गई.
अमृतसर में रविवार को किसानों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस के साथ झड़प होने से माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया. किसानों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखने आए थे, लेकिन पुलिस की ओर से लाठीचार्ज किया गया, जिससे कई किसान घायल हो गए.
किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि उनका कोई भी उद्देश्य घेराव या टकराव का नहीं था. वे डीसी और सीपी को मांग पत्र देकर शांतिपूर्वक धरना देना चाहते थे, लेकिन उन्हें शहर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी गई. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार किसानों की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है और उन्हें अमृतसर में प्रदर्शन करने से रोका जा रहा है.
उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार दोनों पर निशाना साधते हुए कहा कि किसानों की मुख्य मांगों में भारत-अमेरिका समझौता, बिजली संशोधन बिल, लेबर कोड और सीड एक्ट को रद्द करना शामिल है. इसके साथ ही उन्होंने विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर इन मुद्दों पर फैसला लेने की मांग की.
पंधेर ने बताया कि राम तीरथ रोड पर हुई झड़प के दौरान तीन से चार किसान घायल हुए और कुछ पुलिसकर्मियों को भी चोटें आईं. उनका दावा है कि लाठीचार्ज की शुरुआत पुलिस की ओर से की गई, जिससे अचानक अफरा-तफरी मच गई. इसके बावजूद किसानों ने आंदोलन जारी रखने का फैसला किया.
किसान नेताओं के मुताबिक पुलिस ने लगभग 10 किलोमीटर के इलाके को घेरे रखा और 35 से 40 किसानों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें कुछ महिलाएं और एक 70 साल की बुजुर्ग महिला भी शामिल हैं. किसानों ने गिरफ्तार साथियों की तुरंत रिहाई की मांग की.
उन्होंने यह भी कहा कि वे सड़क जाम नहीं करेंगे और बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन जब तक उनकी मांगों पर ठीक तरीके से विचार नहीं किया जाता, आंदोलन जारी रहेगा. किसानों ने सरकार को चेतावनी दी कि अगर जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो संघर्ष को और तेज किया जाएगा.