
आगरा में अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र (CIP) के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र CSARC की दूसरी समन्वय समिति की अहम बैठक आयोजित की गई. बैठक का मुख्य उद्देश्य CSARC को केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया में आलू और शकरकंद की आधुनिक रिसर्च, तकनीक और ज्ञान साझा करने का प्रमुख केंद्र बनाना है. इसमें भारत के साथ नेपाल, बांग्लादेश और भूटान के कृषि विशेषज्ञों ने भी हिस्सा लिया.
बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि कृषि क्षेत्र में होने वाली वैज्ञानिक रिसर्च का फायदा सीधे किसानों तक पहुंचना चाहिए. उन्नत किस्मों, बेहतर क्वालिटी वाले बीज, आधुनिक खेती की तकनीक और फसलों में लगने वाली बीमारियों की जल्द पहचान पर काम करने की जरूरत बताई गई. लक्ष्य है कि नई तकनीकों के इस्तेमाल से किसानों की पैदावार बढ़े, खेती की लागत घटे और उनकी आमदनी में बढ़ोतरी हो.
जलवायु परिवर्तन और मौसम में लगातार हो रहे बदलावों को देखते हुए ऐसी फसल किस्मों और तकनीकों को विकसित करने पर जोर दिया गया, जो सूखे, ज्यादा बारिश, बढ़ते तापमान और दूसरी मौसमी चुनौतियों का सामना कर सकें. CSARC के जरिए आलू और शकरकंद की खेती से जुड़ी ऐसी तकनीकों को विकसित करने की योजना है, जिनका फायदा भारत के साथ-साथ दक्षिण एशिया के दूसरे देशों के किसानों को भी मिल सके.
CSARC को उत्तर प्रदेश तक सीमित रखने के बजाय देश के दूसरे प्रमुख कृषि राज्यों और पड़ोसी देशों तक इसके काम को पहुंचाने पर भी चर्चा हुई. गुजरात, मध्य प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों को भी इस नेटवर्क से जोड़ने की योजना है. साथ ही नेपाल, बांग्लादेश और भूटान के साथ कृषि तकनीक, वैज्ञानिक जानकारी और सफल प्रयोगों को साझा करने पर जोर दिया गया, जिससे पूरे क्षेत्र के किसानों को बेहतर खेती के नए विकल्प मिल सकें.
बैठक में CSARC के अब तक के काम की समीक्षा के साथ 2026-31 की विकास योजना पर भी चर्चा की गई. सदस्यों ने इस बात पर सहमति जताई कि नई कृषि तकनीकों को सिर्फ रिसर्च सेंटर तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि उन्हें ‘खेत से बाजार तक’ पहुंचाया जाना चाहिए. इससे किसानों को बेहतर उत्पादन के साथ-साथ बाजार की जरूरत के मुताबिक फसल तैयार करने और बेहतर कमाई करने में मदद मिलेगी.
बैठक के बाद अधिकारियों और कृषि विशेषज्ञों ने आगरा के सिंगना गांव स्थित CSARC फार्म का दौरा किया. यहां उन्हें केंद्र के निर्माण कार्य, वैज्ञानिक सुविधाओं और आलू-शकरकंद की आधुनिक रिसर्च से जुड़ी जानकारी दी गई. विशेषज्ञों ने देखा कि किस तरह इस केंद्र को भविष्य में दक्षिण एशिया के किसानों के लिए नई तकनीक और उन्नत कृषि समाधान उपलब्ध कराने वाले विश्वस्तरीय केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है.