हमारे देश में चारागाह लगातार सिमट रहे हैं. अपने ही चारागाहों यानी शामलात भूमि पर उन्हीं गांवों के लोगों ने कब्जा कर लिया है. शामलात भूमि पर दशकों से हो रहे कब्जों के नतीजे अब देखने को मिल रहे हैं. शामलात भूमि कम होने से पशुधन कम हो रहा है. घास और चारे का संकट लगातार बढ़ रहा है. लेकिन चारों तरफ फैले इस संकट में कुछ उदाहरण ऐसे भी हैं जहां से उम्मीद की रोशनी दिखाई पड़ रही हैं. राजस्थान के कई गांवों में शामलात भूमि को विकसित करने के लिए चारागाह विकास समितियां बन रही हैं. ये समिति अपने गांव के चारागाह के प्रबंधन, सुरक्षा से लेकर उसे विकसित करने में अपनी भूमिका निभा रही हैं.