
पंजाब के फिरोजपुर जिले में किसानों ने अपनी जमीन के मुआवजे की मांग को लेकर अनोखे तरीके से विरोध प्रदर्शन किया. किसानों के एक समूह ने नेशनल हाईवे-5 के एक हिस्से पर कब्जा कर लिया और फिरोजशाह टोल प्लाजा के सामने सड़क पर मिट्टी डालकर धान की बुवाई शुरू कर दी. प्रदर्शन कर रहे किसानों का कहना है कि जिस जमीन पर टोल प्लाजा बनाया गया है, वह उनकी पुश्तैनी जमीन है, लेकिन इसके बदले उन्हें अब तक कोई मुआवजा नहीं मिला है. किसान गुरसेवक सिंह ने दावा किया कि टोल प्लाजा उनकी और उनके भाई सतनाम सिंह की जमीन पर बनाया गया है, फिर भी संबंधित अधिकारियों ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया है.
किसान गुरसेवक सिंह ने आरोप लगाया कि साल 2019 में नेशनल हाईवे परियोजना के लिए उनकी जमीन का अधिग्रहण किया गया था. उन्होंने दावा किया कि अधिग्रहित जमीन के अलावा भी 3 कनाल से अधिक अतिरिक्त जमीन पर जबरन कब्जा कर लिया गया, लेकिन इसके बदले उन्हें कोई मुआवजा नहीं दिया गया. उनके अनुसार, सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज जमीन का मुआवजा तो जारी कर दिया गया था, लेकिन वास्तव में टोल प्लाजा और सड़क निर्माण के लिए उससे अधिक जमीन का उपयोग किया गया. गुरसेवक सिंह ने कहा कि बाद में राजस्व विभाग के अधिकारियों द्वारा दोबारा की गई पैमाइश में अतिरिक्त जमीन पर कब्जे की पुष्टि हुई, जिससे उनके दावे को बल मिला.
किसान गुरसेवक ने कहा कि वो पिछले आठ सालों से न्याय पाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला. उन्होंने हर संभव दरवाज़ा खटखटाया और ज़िला अधिकारियों से मिले, लेकिन सब बेकार रहा. उन्होंने कहा कि कई बार प्रशासन और संबंधित विभागों के सामने अपनी बात रखने के बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ. इसी से नाराज होकर उन्होंने सड़क पर ही धान की बुवाई कर विरोध दर्ज किया.
उन्होंने कहा कि यदि उनकी शिकायत का समाधान नहीं किया गया, तो वे उस पूरी 3 कनाल जमीन पर धान की खेती करेंगे, जो उनके परिवार की वैध संपत्ति है. उन्होंने आरोप लगाया कि लोक निर्माण विभाग (PWD) और नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के अधिकारियों ने समस्या का समाधान करने के बजाय केवल पत्राचार तक ही खुद को सीमित रखा.
गुरसेवक सिंह ने बताया कि पिछले सप्ताह हम वरिष्ठ अधिकारियों से मिले थे. उस समय हमें आश्वासन दिया गया था कि एक सप्ताह के भीतर मामले का समाधान कर दिया जाएगा, लेकिन अब तक जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाने के कारण उन्हें अपना विरोध प्रदर्शन तेज करना पड़ा और भारतीय किसान यूनियन (एकता उग्राहन) का समर्थन लेना पड़ा. उन्होंने स्पष्ट किया कि अतिरिक्त कब्जाई गई जमीन का उचित मुआवजा मिलने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा. हालांकि बाद में राजस्व विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और किसानों से बातचीत कर उन्हें शांत कराया, जिसके बाद प्रदर्शन समाप्त कर दिया गया. (PTI)