
शहद उत्पादन और निर्यात से जुड़े किसानों, मधुमक्खी पालकों के लिए सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है. दरअसल, केंद्र सरकार ने प्राकृतिक शहद पर लागू न्यूनतम निर्यात मूल्य यानी मिनिमम एक्सपोर्ट प्राईस को मार्च 2026 तक बढ़ा दिया है. इस फैसले की वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय शहद की सही कीमत तय करना और उसकी क्वालिटी बनाए रखना है. साथ ही निर्यातकों को अनुचित प्रतिस्पर्धा से बचाना है. बता दें कि लंबे समय से शहद उद्योग से जुड़े लोग इस तरह के फैसले की मांग कर रहे थे.
न्यूनतम निर्यात मूल्य वह तय कीमत होती है, जिससे कम दाम पर किसी उत्पाद को विदेश भेजने की अनुमति नहीं होती. प्राकृतिक शहद के मामले में यह कीमत 1,400 अमेरिकी डॉलर प्रति मीट्रिक टन तय की गई है. इसका सीधा मतलब यह है कि इससे कम कीमत पर शहद का निर्यात नहीं किया जा सकेगा. सरकार का मानना है कि कम कीमत पर निर्यात से न सिर्फ देश को विदेशी मुद्रा का नुकसान होता है, बल्कि बेकार क्वालिटी वाला माल भी बाजार में पहुंच सकता है, जिससे भारत की छवि खराब हो सकती है.
प्राकृतिक शहद पर न्यूनतम निर्यात मूल्य की व्यवस्था पहली बार मार्च 2024 में लागू की गई थी. तब से लेकर अब तक सरकार इस नीति की लगातार समीक्षा कर रही है. साल के अंतिम दिन लिए गए ताजा फैसले में इसे तीन महीने और बढ़ाकर मार्च 2026 के अंत तक लागू रखने का निर्णय लिया गया है. वहीं, अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों और बाजार में उतार-चढ़ाव को देखते हुए यह कदम बेहद जरूरी था.
भारत का प्राकृतिक शहद कई देशों में लोकप्रिय है. बता दें कि भारत के प्राकृतिक शहद को अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और कतर जैसे देशों बड़े पैमाने पर खरीदा जाता है. इन बाजारों में भारतीय शहद की मांग उसकी प्राकृतिक मिठास, सुगंध और क्वालिटी के कारण बनी हुई है.