महिला किसानों को मिले खेती में पहचान और जमीन का हक, भारतीय किसान संघ ने उठाई आवाज

महिला किसानों को मिले खेती में पहचान और जमीन का हक, भारतीय किसान संघ ने उठाई आवाज

दिल्ली में भारतीय किसान संघ (BKS) के अखिल भारतीय महिला किसान सम्मेलन का आयोजन हुआ. सम्मेलन में महिला किसानों को खेती में उनकी भूमिका के मुताबिक पहचान देने, जमीन के मालिकाना हक और कृषि नीतियों में उनकी भागीदारी बढ़ाने की मांग उठाई गई.

महिला किसानों को मिले खेती में पहचान (AI- तस्वीर)महिला किसानों को मिले खेती में पहचान (AI- तस्वीर)
क‍िसान तक
  • New Delhi,
  • Oct 01, 2026,
  • Updated Oct 01, 2026, 1:23 PM IST

दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में भारतीय किसान संघ (BKS) की ओर से अखिल भारतीय महिला किसान सम्मेलन आयोजित किया गया. सम्मेलन में देश के अलग-अलग राज्यों से बड़ी संख्या में महिला किसान शामिल हुईं. इस दौरान खेती में महिलाओं के योगदान को पहचान देने, उन्हें नीति बनाने की प्रक्रिया में शामिल करने और जमीन के मालिकाना हक से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा हुई.

खेती में महिलाओं की भूमिका को मिले पहचान

BKS की अखिल भारतीय महिला संयोजक मंजू दीक्षित ने कहा कि जब किसान की बात होती है तो आमतौर पर एक पुरुष की तस्वीर सामने आती है, जबकि खेतों में महिलाएं भी लगातार काम करती हैं. उन्होंने कहा कि महिला किसान सालभर खेती से जुड़े काम करती हैं और उनके योगदान को उचित पहचान मिलनी चाहिए. उन्होंने कहा कि खेती से जुड़े कामों में महिलाओं की बड़ी भूमिका है, लेकिन खेती की जमीन के मालिकाना हक में उनकी हिस्सेदारी काफी कम है, इसलिए महिला किसानों को जमीन के अधिकार और खेती से जुड़ी नीतियों में भी उचित जगह मिलनी चाहिए.

देशभर से पहुंचीं महिला किसान

इस सम्मेलन में मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, कश्मीर और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों से महिला किसानों ने हिस्सा लिया. संगठन के मुताबिक, अलग-अलग राज्यों और गांवों से हजारों महिला किसान और कृषि मजदूर सम्मेलन में शामिल हुए. BKS के अनुसार, संगठन के करीब 42 लाख सदस्यों में लगभग 7 लाख महिलाएं कार्यकर्ता के तौर पर जुड़ी हुई हैं. ये महिला कार्यकर्ता राज्य, जिला, तहसील और गांव स्तर पर संगठन के साथ काम करती हैं.

जैविक खेती और बीज संरक्षण पर जोर

सम्मेलन में जैविक खेती, पारंपरिक बीजों के संरक्षण, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण और रोजगार सृजन जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई. महिला किसानों से पारंपरिक बीजों और आधुनिक खेती की तकनीकों को लेकर अनुभव साझा करने की अपील की गई. साथ ही मिट्टी की सेहत और खेती को जलवायु से जुड़े बदलावों के साथ जोड़कर देखने पर भी जोर दिया गया.

महिला किसानों को किया गया सम्मानित

कार्यक्रम में गाय आधारित खेती, कृषि व्यापार, जैविक खेती, बीज संरक्षण, पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में काम करने वाली महिला किसानों को सम्मानित किया गया. सम्मेलन में अलग-अलग राज्यों से आई महिलाओं ने अपनी पारंपरिक वेशभूषा में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए. लोक गीत और नृत्य के जरिए देश की सांस्कृतिक विविधता की झलक देखने को मिली.

2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य पर चर्चा

BKS के राष्ट्रीय महासचिव मोहिनी मोहन मिश्रा ने कहा कि 2047 तक विकसित और स्वस्थ भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए जैविक और रसायन-मुक्त खेती को बढ़ावा देने की जरूरत है. उन्होंने पौष्टिक भोजन और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने वाली नीतियों पर जोर दिया. वहीं, संगठन के आयोजन सचिव दिनेश कुलकर्णी ने कहा कि आत्मनिर्भर महिला किसानों को पहचान मिलने से गांव, परिवार और समाज को मजबूती मिलेगी. यह सम्मेलन 2026 को महिला किसानों के अंतरराष्ट्रीय वर्ष के रूप में मनाए जाने के संदर्भ में आयोजित किया गया. (PTI)

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